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हे माँ


हे माँ 
तू कितनी भोली हैं
तू कितनी चिंता करती हैं मेरी
मैं तुझे रोज कितना छलता हूँ
तुझसे कितना झूठा सच बोलता हूँ
सिर्फ कोरा झूठा सच
मैं सोचता हूँ
जो बातें तेरे से छिपाता हूँ
वह तू नहीं जानती
लेकिन माँ /तू तो माँ हैं
तू  सब कुछ जानती हैं
तू जननी हैं
तू मेरी झूठ में भी
मेरा भला चाहती हैं
माँ तू कितनी करुणामयी हैं
एक दम जगदम्बा की तरह
लेकिन माँ
तुझे दुःख ना हो इसलिए 
तेरे से मैं बातें छिपाता हूँ
अगर बता दूँ तो 
तू दिन भर व्याकुल रहती  हैं
सोचती रहती हैं 
मेरा बेटा मुसीबत में हैं 
उस दिन तुझसे  खाना भी नही खाया जाता
माँ तेरे जगाने से ही मैं उठता हूँ
तुझसे ही मैंने जाना दिन कैसे निकलता हैं
तू ही मेरा सूरज हैं
तेरी ममता के प्रकाश में 
मैं नित नए सोपानों पर चढ़ता हूं
भीषण अंधकार झंझावातों में 
तेरी ममता का प्रकाश ही मुझे राह दिखाता हैं
माँ तू सत्य हैं,
सूरज,चाँद,पृथ्वी,हवा पानी,प्रकृति की तरह
तेरा सामीप्य पाकर 
हृदय निर्मल हो जाता हैं,
तेरे ममतामयी आँचल की छाया में
मै सदा सुरक्षित हूँ
तू मेरा भगवान हैं,
तू ही मेरी सब कुछ हैं
मै तेरा पुत्र हूं
तेरी करुणा  ही मेरा संबल हैं
तेरा स्नेह ही मेरा जीवन हैं
तेरे बिना मै व्याकुल रहता हूँ माँ
तू ये मत सोचना की मै तुझसे दूर हूँ
तू हमेशा मेरी आँखों के सामने हैं माँ
मेरी माँ 
माँ 


आपका
पुत्र
चित्र ललित शर्मा

Comments :

10 टिप्पणियाँ to “हे माँ”
dev ने कहा…
on 

माँ तू सत्य हैं,
सूरज,चाँद,पृथ्वी,हवा पानी,प्रकृति की तरह
तेरा सामीप्य पाकर
हृदय निर्मल हो जाता हैं,

bahut hi marmik rachana hai,maa aakhir maa hi hoti hai,aapko shubhkamnayen

Nirmla Kapila ने कहा…
on 

सुन्दर और सत्य माँ की महिमा बधाई

pankaj vyas ने कहा…
on 

maa ki mahi ma ka gaan karate rahoo...

school ने कहा…
on 

bahut sundar racha hai lalit ji, ma ke bare me
yehi satya hai,aaj kavita ke saath apne pentig bhi apni lagayi hai, aapke srijan ko naman karta hun,apko meri shubhkamnayen

kriti ने कहा…
on 

mujhe yeh kavita bahut achi lagi and its title is very touchabale that is mother and we all love our mother

M VERMA ने कहा…
on 

माँ को नमन

Kulwant Happy ने कहा…
on 

माँ को नमन, लाल को सलाम।

जन्नत रखा है मैंने माँ का नाम।

kumar zahid ने कहा…
on 

मां का कोई भी वर्णन नहीं कर सकता.. मां शब्दों से परे है..
पर जो कुंभ आपने बनाया है वह निश्चित रूप से बहुत बहुत सुन्दर है..बधाई

Shobhna Choudhary ने कहा…
on 

माँ की महानता के आगे सब कम है

अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी ने कहा…
on 

माँ तू सत्य हैं,
सूरज,चाँद,पृथ्वी,हवा पानी,प्रकृति की तरह
तेरा सामीप्य पाकर
हृदय निर्मल हो जाता हैं,
--------- सच कहा ..
बस आज मुनव्वर राना की गजलें पढ़ रहा हूँ ,,,

 

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