बुधवार, 2 जुलाई 2014

रामपुर गांव

नदियों में नाथ
शिवनाथ नदी के तीर बसा हुआ
सूंदर सा गाँव रामपुर,
जहाँ पीपल की छांव,
मांझी की नाव,
नदी तट पर जलक्रीड़ा करती सोन मछरिया,
सुंदर साधारण घर-दुवरिया,
मंथर जल को
पैरों की छपछपाहट से उकसाती छोरी,
महादेव संग बैठी गौरी
सब कुछ है इस गाँव रामपुर में
कलचुरीकाल का त्रिस्तरीय शिवालय,
जिसका नंदी खंड खंड हो बाहर पड़ा
अपनी दूर्दशा पर टसुए बहा रहा है,
हाथ जोड़े नृपति
जीर्णों उद्धार संरक्षण की बाट जोह रहा है।
यायावर ने यह खुबसूरत स्थान देखा
तो मन मचल गया,
नदिया, गोरी, छोरी, छावं,
पीपल देख कर वैराग्य न धर ले
इसलिए टहल टल गया।

मंगलवार, 10 जून 2014

मौसमी गजल



पत्तियाँ पीली हुई पीपल के झाड़ की
बरफ़ पिघलने लगी दोस्तों पहाड़ की

छुट्टा छोड़ दिया किस ने सूरज को
जैसे सांकल खुल गई हो सांड़ की

सुबह से ही लहकने लगी है गरमी
सटक गई बेचारे कूलर जुगाड़ की

कट गए सब पेड़ हरियाली है गायब
दशा खराब हुई अब गांव गुवाड़ की

त्राहि त्राहि मची पारा भी चढ गया
बस जरुरत है यारों पहली फ़ुहार की

शनिवार, 24 मई 2014

कविता तुम्हारी

नही पढ पाता मैं
भावोत्पादक कविताएं
सीधे दिल में उतरती हैं
और निर्झर बहने लगता है
एक एक शब्द
अंतर में उतर कर
बिंध डालता है मुझे
आप्लावित दृग
देख नहीं पाते
छवि तुम्हारी
बिसरने की कल्पना मात्र
तार तार कर देती है
जीवन रेखा को