शिल्पकार. Blogger द्वारा संचालित.

चेतावनी

इस ब्लॉग के सारे लेखों पर अधिकार सुरक्षित हैं इस ब्लॉग की सामग्री की किसी भी अन्य ब्लॉग, समाचार पत्र, वेबसाईट पर प्रकाशित एवं प्रचारित करते वक्त लेखक का नाम एवं लिंक देना जरुरी हैं.
स्वागत है आपका

गुगल बाबा

इंडी ब्लागर

 

इसे अवश्य पढिए-अच्छे लोग किनारे हो गए!!!

कल रात की बात है, हम कुछ लिख रहे थे तभी चैट पर हमारे बड़े भाई गिरीश पंकज जी का आगमन हुआ और उन्होंने पूछ "फौजी भाई क्या हाल चाल है"  हमने कहा नमस्ते भैया सब ठीक है. आनंद है. आज आप हिंदी में लिख रहे हैं. तो गिरीश भाई बोले" कट पेस्ट का जमाना है इस लिए कट पेस्ट कर रहा हूँ" हमने कहा चलिए अच्छी बात है....
कट गया फट गया खिस्को हो गया. अब इसका मोल भी डिस्को हो गया. 
तो गिरीश भाई बोले ये तो कविता हो रही है तुकबंदी" अब मित्रों इस तुक बंदी का सिलसिला चल पड़ा आगे चल कर क्या बना? ज्यों का त्यों आपके सामने प्रस्तु कर रहा हूँ. इस गजल लेखन को गिरीश भाई ने मजमुआ गजल कहा. अब ये मजमुआ गजल आपके समक्ष पेश है. कृपया आपका आशीर्वाद चाहूँगा.

Girish: अच्छे लोग किनारे हो गए/ मंचो पर हत्यारे हो गए
ललित: काले पीले सारे हो गए/सच्चे सब बेचारे हो गए
Girish: लुच्चो का है राज यहाँ पर/ श्वेत सभी कजरारे हो गए.
ललित: मेहनत कश को रोटी नही, चमचों के चटखारे हो गए
Girish: काम यहाँ कुछ कैसे होगा/ खाली-पीली नारे हो गए
ललित: डंडा लेकर घुमने वाले/उनकी आंखो के तारे हो गए
Girish: जो कमजोर बहुत थे वे ही. सत्ता के सहारे हो गए.
          शातिर खुल्ले घूम रहे है. हम अल्ला को प्यारे हो गए....
ललित:सच की राह पे चलने वाले / देखो अब बेसहारे हो गए

Girish: सत्ता पाकर दो कौड़ी भी/ आसमान के तारे हो गए
ललित: छाती पीट पीट के लगाते थे/ झुठे वे सब नारे हो गए
          खुन बह रहा है गलियों मे/ नेता सब हत्यारे हो गए


अब इस तरह यह मजमुआ गजल तैयार हो गई, जैसे थी वैसी ही प्रस्तुत कर रहा हूँ. आखरी की दो पंक्तियाँ 


Girish: जैसे जिन्दगी एक जुआ हो गयी.
ललित: वैसे ही ग़ज़ल मजमुआ हो गयी 
 
आपका
शिल्पकार


 

Comments :

37 टिप्पणियाँ to “इसे अवश्य पढिए-अच्छे लोग किनारे हो गए!!!”
बेनामी ने कहा…
on 

रोचक।

Gyan Darpan ने कहा…
on 

ये भी खूब रही !

Udan Tashtari ने कहा…
on 

चिट्ठाचर्चा डोमेन लेकर, लफड़े कितने सारे हो गये


:)


मुक्कमल गज़ल निखर आई...:)

कडुवासच ने कहा…
on 

..... कमाल-धमाल... छा गये....बहुत सुन्दर !!!

Udan Tashtari ने कहा…
on 

चिट्ठाचर्चा डोमेन लेकर, लफड़े कितने सारे हो गये
नीलामी की बात सुनी तो, सबके वारे न्यारे हो गये.. :)

Udan Tashtari ने कहा…
on 

मूँछें तेरी देख देख कर, डर कर बदली फितरत उनकी,
खूं में मिला नमक था जिनके, शक्कर वाले पारे हो गये.

-अब सोने जा रहे हैं, गुड नाइट, फौजी भाई!!

निर्मला कपिला ने कहा…
on 

Girish: जैसे जिन्दगी एक जुआ हो गयी.
ललित: वैसे ही ग़ज़ल मजमुआ हो गयी
वाह लाजवाब

गिरीश बिल्लोरे मुकुल ने कहा…
on 

इस अप्रत्याशित साझी कविता नुमा ग़ज़ल के लिए मैं नत मस्तक हूँ गुरु देव

Unknown ने कहा…
on 

गज़ल मजमुआ ही सही पर वार करारे हो गये

राजीव तनेजा ने कहा…
on 

साथी हाथ बढ़ाना ...साथी रे...
एक अकेला थक जाएगा मिलकर बोझ उठाना ...
एक और एक सच में ग्यारह हो गए यहाँ तो...
बहुत ही बढ़िया

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…
on 

वाह ये प्रयोग तो बहुत बढ़िया रहा!
दोनों को बधाई!

Khushdeep Sehgal ने कहा…
on 

हारी बाज़ी जीतना आता है,
इसीलिए वो शेरसिंह कहलाता है...

जय हिंद...

पी.सी.गोदियाल "परचेत" ने कहा…
on 

बहुत खूब, गुरूजी बढ़िया समा बाँधा दो कलाकारों ने !

अजय कुमार ने कहा…
on 

अच्छी है ये चैटिंग गजल

राज भाटिय़ा ने कहा…
on 

बहुत सुंदर लगी आप की यह सुंदर सुंदर तुंक बंदी, लेकिन अब तो यह तुंक बंदी नही एक सुंदर रचना बन गई

Yashwant Mehta "Yash" ने कहा…
on 

Gazal Jodi

ताऊ रामपुरिया ने कहा…
on 

चाल्हे पाड दिये फ़ौजी तन्नै तो. लाग्या रह ..इब पौ पाटन आली सै.:)

रामराम.

समयचक्र ने कहा…
on 

खूब रही...

जो आँखों के नूर थे बेनूर हो गए ...

shikha varshney ने कहा…
on 

wah badhiya jugalbandi rahi

vandan gupta ने कहा…
on 

ye style bhi bahut badhiya raha.

Amrendra Nath Tripathi ने कहा…
on 

मन मोहाय गवा इहाँ ---
'' लुच्चो का है राज यहाँ पर/ श्वेत सभी कजरारे हो गए. ''
इसतरह से भी पोस्टें आती हैं ! जान कर मजा आया !
....... आभार ,,,

Unknown ने कहा…
on 

waah bhai waah !
waah bhai waah !
waah bhai waah !
waah bhai waah !
waah bhai waah !
waah bhai waah !
waah bhai waah !
waah bhai waah !
waah bhai waah !
waah bhai waah !
waah bhai waah !
waah bhai waah !
waah bhai waah !
waah bhai waah !
waah bhai waah !
waah bhai waah !
waah bhai waah !
waah bhai waah !
waah bhai waah !
waah bhai waah !
waah bhai waah !
waah bhai waah !
waah bhai waah !
waah bhai waah !
waah bhai waah !
waah bhai waah !
waah bhai waah !
waah bhai waah !
waah bhai waah !
waah bhai waah !

Pt. D.K. Sharma "Vatsa" ने कहा…
on 

यूँ के हमें ज्यादा बात करने की तो आदत है नहीं लेकिन एक बात साफ साफ कहे देते हैं कि ये जो भी चीज बनी है,एकदमजोरदार,शानदार,मजेदार ओर बाकी भी जितने दार हैं,वे भी लगा लीजिए :)

drsatyajitsahu.blogspot.in ने कहा…
on 

excellent

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…
on 

यूं ही लिखते-लिखते ब्लागर कितने सारे हो गये,
इन्हीं सारी हरकतों से आप सब के प्यारे हो गये।


क्या बात है पहली टिप्पणी ही "बेनामी" है।

दीपक 'मशाल' ने कहा…
on 

वाह सर, कई साल पहले मैंने और मेरे एक सीनिअर ने मिल के ऐसे ही एक कविता का सृजन किया था.. अब तो वो सीनिअर बड़े वैज्ञानिक हो गए हैं.... आपने याद ताज़ा कर दी
बहुत ही उत्तम रचना लगी.. सुन्दर जुगलबंदी.. आपकी नक़ल करके मैं भी वो रचना आज पोस्ट करूंगा.. शायद इतनी सुन्दर तो नहीं है लेकिन फिर भी..
जय हिंद... जय बुंदेलखंड...

rashmi ravija ने कहा…
on 

बातों बातों में तो यहाँ अच्छी रचना तैयार हो गयी...बहुत खूब

Unknown ने कहा…
on 

agar sadharan si baate karte karte achhi cheez nikal aati hai to ise adbhut kahna chahiye .......bahut gazab

VIKAS PANDEY

Mithilesh dubey ने कहा…
on 

बहुत खूब , आंनद आ गया ।

शरद कोकास ने कहा…
on 

अच्छा तो गिरिजेश जी का यह वायरस ललित जी तक भी पहुंच गया .. बहुत ही तगड़ा वायरस है भाई अच्छों अच्छों को कवि बना देता है बचके रहना रे बाबा ...

बवाल ने कहा…
on 

अय हय फ़ौजी भाई ग़ज़ले-ग़ज़ब है जी यह तो ।

हर्ष वर्द्धन हर्ष ने कहा…
on 

मान गए उस्ताद। बेहतरीन रचना।

36solutions ने कहा…
on 

बहुत सुन्दर मजमुआ गजल भैया. धन्यवाद.

दिगम्बर नासवा ने कहा…
on 

Jugal bandi jordaar rahi .....

toshi gupta ने कहा…
on 

बातो ही बातो में निकली बात आम से ख़ास हो गई...

जगजीत सिंह जी कि लाइन याद आ रही है..

"बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी ........"

alka mishra ने कहा…
on 

अब तो अलबेला जी ने इतनी वाह कर दी है कि सारा स्टाक ही ख़त्म हो गया ,अब तो डीपो से परमिट बनवाना पड़ेगा

सूर्यकान्त गुप्ता ने कहा…
on 

वाह वाह!
क्या बात है, हम कहाँ चल बसे थे
सचमुच हमारे लिए आपकी ये ग़ज़ल
झाँकने के लिए
अँधेरे सब गलियारे हो गये थे
जैसा कि हौवा बना हुआ थे हमारे विभाग में

 

लोकप्रिय पोस्ट

पोस्ट गणना

FeedBurner FeedCount

यहाँ भी हैं

ईंडी ब्लागर

लेबल

शिल्पकार (94) कविता (65) ललित शर्मा (56) गीत (8) होली (7) -ललित शर्मा (5) अभनपुर (5) ग़ज़ल (4) माँ (4) रामेश्वर शर्मा (4) गजल (3) गर्भपात (2) जंवारा (2) जसगीत (2) ठाकुर जगमोहन सिंह (2) पवन दीवान (2) मुखौटा (2) विश्वकर्मा (2) सुबह (2) हंसा (2) अपने (1) अभी (1) अम्बर का आशीष (1) अरुण राय (1) आँचल (1) आत्मा (1) इंतजार (1) इतिहास (1) इलाज (1) ओ महाकाल (1) कठपुतली (1) कातिल (1) कार्ड (1) काला (1) किसान (1) कुंडलियाँ (1) कुत्ता (1) कफ़न (1) खुश (1) खून (1) गिरीश पंकज (1) गुलाब (1) चंदा (1) चाँद (1) चिडिया (1) चित्र (1) चिमनियों (1) चौराहे (1) छत्तीसगढ़ (1) छाले (1) जंगल (1) जगत (1) जन्मदिन (1) डोली (1) ताऊ शेखावाटी (1) दरबानी (1) दर्द (1) दीपक (1) धरती. (1) नरक चौदस (1) नरेश (1) नागिन (1) निर्माता (1) पतझड़ (1) परदेशी (1) पराकाष्ठा (1) पानी (1) पैगाम (1) प्रणय (1) प्रहरी (1) प्रियतम (1) फाग (1) बटेऊ (1) बाबुल (1) भजन (1) भाषण (1) भूखे (1) भेडिया (1) मन (1) महल (1) महाविनाश (1) माणिक (1) मातृशक्ति (1) माया (1) मीत (1) मुक्तक (1) मृत्यु (1) योगेन्द्र मौदगिल (1) रविकुमार (1) राजस्थानी (1) रातरानी (1) रिंद (1) रोटियां (1) लूट (1) लोकशाही (1) वाणी (1) शहरी (1) शहरीपन (1) शिल्पकार 100 पोस्ट (1) सजना (1) सजनी (1) सज्जनाष्टक (1) सपना (1) सफेदपोश (1) सरगम (1) सागर (1) साजन (1) सावन (1) सोरठा (1) स्वराज करुण (1) स्वाति (1) हरियाली (1) हल (1) हवेली (1) हुक्का (1)