शिल्पकार. Blogger द्वारा संचालित.

चेतावनी

इस ब्लॉग के सारे लेखों पर अधिकार सुरक्षित हैं इस ब्लॉग की सामग्री की किसी भी अन्य ब्लॉग, समाचार पत्र, वेबसाईट पर प्रकाशित एवं प्रचारित करते वक्त लेखक का नाम एवं लिंक देना जरुरी हैं.
स्वागत है आपका

गुगल बाबा

इंडी ब्लागर

 

जाग रे! जाग रे! जाग रे! मनवा .............


जाग रे,जाग रे,जाग रे मनवा जाना है उस पार
करके  अपनी खाली कुटिया,अब हो  जा तैयार
रे! मनवा जाना है उस पार

हुई सांझ तो रात-रानी, ले आई खुशबु का हार
महका  ले तु  अपना  मन,खोल  ह्रदय के द्वार 
रे! मनवा जाना है उस पार

गई  रात  तो  आया  सवेरा, ले किरण उपहार
मिल जायेगा तुझे किनारा,अब धरले पतवार
रे! मनवा जाना है उस पार

इस नदिया  के दो पार हैं,हमरे प्रियतम उस पार
चलते-चलते बढ़ते जाना,धर प्रियतम का ध्यान 
रे! मनवा जाना है उस पार

अपने  सपने  छलते जाएँ,तुझको अनगिन बारम्बार
जो जागेगा,वो कर पायेगा, अपने प्रियतम का दीदार
रे! मनवा जाना है उस पार

चमकेंगे तब हजारों सूरज,भूल जायेगा तु संसार 
आनंद  रस  की  लहर  उठेगी,जा प्रियतम के द्वार 
रे! मनवा जाना है उस पार   

आपका
शिल्पकार,



फोटो गूगल से साभार

   
 

Comments :

9 टिप्पणियाँ to “जाग रे! जाग रे! जाग रे! मनवा .............”
पी.सी.गोदियाल ने कहा…
on 

सुन्दर गीत ललित जी, पर ये मनवा के ही भरोशे पतवार में मत बैठ जाना, क्योंकि आजकल ये मनवा भी भरोशे के काबिल नहीं रहे !

ललित शर्मा ने कहा…
on 

गोदियाल साब,जब मांझी आप जैसा तगड़ा हो तो
बिना पतवार के भी नाव पार लग जाती है, पतवार नही आत्मबल चाहिए। आभार

Anil Pusadkar ने कहा…
on 

कईसे महाराज?ये प्रियतम का दीदार कोई लफ़ड़ा-वफ़ड़ा तो नही है ना। हा हा हा हा हा।

Nirmla Kapila ने कहा…
on 

सुन्दर गीत के लिये बधाई

Mishra Pankaj ने कहा…
on 

अपने सपने छलते जाएँ,तुझको अनगिन बारम्बार
जो जागेगा,वो कर पायेगा, अपने प्रियतम का दीदार
रे! मनवा जाना है उस पार
वाह ललित जी वाह मस्त है साहब जी ये उपदेशात्मक रचना

ललित शर्मा ने कहा…
on 

नही गा,अनिल भैया,कौउनो लफ़ड़ा वफ़ड़ा नैइ ए बबा, जम्मो बुता हां तोरे जैइसे हवे, जईसन गुरु तईसन चेला-तोरे पाछु-पाछु रेंगत हन गा।

ललित शर्मा ने कहा…
on 

धन्यवाद पंकज मिसिर जी-आभार

M VERMA ने कहा…
on 

चमकेंगे तब हजारों सूरज,भूल जायेगा तु संसार
आनंद रस की लहर उठेगी,जा प्रियतम के द्वार
बहुत खूबसूरत रचना --- आनन्द रस की लहर उठाती.
वाह

वन्दना ने कहा…
on 

वाह ललित जी…………जिसने मन को साध लिया उसका तो बेडापार है ही…………बस इसी को जगाते रहना चाहिये।

 

लोकप्रिय पोस्ट

पोस्ट गणना

FeedBurner FeedCount

यहाँ भी हैं

ईंडी ब्लागर

लेबल

शिल्पकार (94) कविता (65) ललित शर्मा (56) गीत (8) होली (7) -ललित शर्मा (5) अभनपुर (5) ग़ज़ल (4) माँ (4) रामेश्वर शर्मा (4) गजल (3) गर्भपात (2) जंवारा (2) जसगीत (2) ठाकुर जगमोहन सिंह (2) पवन दीवान (2) मुखौटा (2) विश्वकर्मा (2) सुबह (2) हंसा (2) अपने (1) अभी (1) अम्बर का आशीष (1) अरुण राय (1) आँचल (1) आत्मा (1) इंतजार (1) इतिहास (1) इलाज (1) ओ महाकाल (1) कठपुतली (1) कातिल (1) कार्ड (1) काला (1) किसान (1) कुंडलियाँ (1) कुत्ता (1) कफ़न (1) खुश (1) खून (1) गिरीश पंकज (1) गुलाब (1) चंदा (1) चाँद (1) चिडिया (1) चित्र (1) चिमनियों (1) चौराहे (1) छत्तीसगढ़ (1) छाले (1) जंगल (1) जगत (1) जन्मदिन (1) डोली (1) ताऊ शेखावाटी (1) दरबानी (1) दर्द (1) दीपक (1) धरती. (1) नरक चौदस (1) नरेश (1) नागिन (1) निर्माता (1) पतझड़ (1) परदेशी (1) पराकाष्ठा (1) पानी (1) पैगाम (1) प्रणय (1) प्रहरी (1) प्रियतम (1) फाग (1) बटेऊ (1) बाबुल (1) भजन (1) भाषण (1) भूखे (1) भेडिया (1) मन (1) महल (1) महाविनाश (1) माणिक (1) मातृशक्ति (1) माया (1) मीत (1) मुक्तक (1) मृत्यु (1) योगेन्द्र मौदगिल (1) रविकुमार (1) राजस्थानी (1) रातरानी (1) रिंद (1) रोटियां (1) लूट (1) लोकशाही (1) वाणी (1) शहरी (1) शहरीपन (1) शिल्पकार 100 पोस्ट (1) सजना (1) सजनी (1) सज्जनाष्टक (1) सपना (1) सफेदपोश (1) सरगम (1) सागर (1) साजन (1) सावन (1) सोरठा (1) स्वराज करुण (1) स्वाति (1) हरियाली (1) हल (1) हवेली (1) हुक्का (1)