शिल्पकार. Blogger द्वारा संचालित.

चेतावनी

इस ब्लॉग के सारे लेखों पर अधिकार सुरक्षित हैं इस ब्लॉग की सामग्री की किसी भी अन्य ब्लॉग, समाचार पत्र, वेबसाईट पर प्रकाशित एवं प्रचारित करते वक्त लेखक का नाम एवं लिंक देना जरुरी हैं.
स्वागत है आपका

गुगल बाबा

इंडी ब्लागर

 

मैं चाहने लगी हूँ उस चाँद को!!!


मै
एक छोटी सी
लहर हूँ
समन्दर की
मैं चाहने लगी हूँ
उस चाँद को
उसका आकर्षण
मुझे प्रेरित करता है
आकर्षित करता है
उसका सलोना बांकपन
मुझे मोह लेता है
मै डूबना चाहती हूँ
आनंद में
अनुभूति करना चाहती हूँ
प्रणय की पराकाष्ठा की
मै भी
अस्तितत्व बनाना चाहती हूँ
उन उतुंग पहाडों सा
जो कभी लहरें थे
मेरी तरह
मिलन के आनंद ने
स्थिर कर दिया
उन्हें इस संयोग ने
योगी बना दिया
एक स्पर्श ने
वुजूद दे दिया
योगी बना दिया

आपका
शिल्पकार 

(फोटो गूगल से साभार)

Comments :

16 टिप्पणियाँ to “मैं चाहने लगी हूँ उस चाँद को!!!”
Murari Pareek ने कहा…
on 

उसका सलोना बांकपन
मुझे मोह लेता है
लाजवाब प्यार का इतना सुन्दर रूप !!! सचमुच मोहने वाला

जी.के. अवधिया ने कहा…
on 

सुन्दर रचना!

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…
on 

Khubsurat Bhav se nihit sundar kavita..dhanywaad!!!

Mithilesh dubey ने कहा…
on 

बहुत ही खूबसूरत रचना।

महफूज़ अली ने कहा…
on 

राम.....राम....

बहुत ही लाजवाब कविता...

आपको नव वर्ष की अग्रिम शुभकामनायें...

पी.सी.गोदियाल ने कहा…
on 

बहुत खूबसूरत रचना ललित जी ,

...और फिर ज्वार आ जाता है
उन सुनशान पड़े किनारों पर ......!

समयचक्र ने कहा…
on 

बहुत बढ़िया रचना . नववर्ष की अग्रिम शुभकामना

गिरीश पंकज ने कहा…
on 

dino din behatar kavitaen de rahe ho danaadan... achchha hai. vab varsh ki agrim shubhkamanae.....

Arvind Mishra ने कहा…
on 

दूसरे की बढ़ती किसे अच्छी लगती है मगर जरा इस पगली लहर को तो देखिये चाँद की बढ़त से बौरा उठी है

ताऊ रामपुरिया ने कहा…
on 

बेहद खूबसूरत रचना.

नये साल की रामराम.

राज भाटिय़ा ने कहा…
on 

मुछो वाले भी बहुत सुंदर कविता लिख लेते है, यह आज ही जाना:), बहुत ही सुंदर ओर भाव पुर्ण कविता.
धन्यवाद

निर्मला कपिला ने कहा…
on 

अरे ललित जी आपने शायद वो तस्वीर नहीं देखी चाँद की जो नासा ने भेजी है उसे देख लें पहले । वैसे रचना बहुत खूबसूरत है धन्यवाद्

Udan Tashtari ने कहा…
on 

उफ्फ!! क्या खूब!!



मुझसे किसी ने पूछा
तुम सबको टिप्पणियाँ देते रहते हो,
तुम्हें क्या मिलता है..
मैंने हंस कर कहा:
देना लेना तो व्यापार है..
जो देकर कुछ न मांगे
वो ही तो प्यार हैं.


नव वर्ष की बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ.

मनोज कुमार ने कहा…
on 

बहुत ही अच्छी अभिव्यक्ति। बहुत-बहुत धन्यवाद
आपको नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

शबनम खान ने कहा…
on 

kitna masoom pyar hai.....
janti ha vo leher ki n mil payega vo chand use...fir bhi...intezar aur aas....
yahi to pyar ha...
bohot khoob...
shukriya

suryakant gupta ने कहा…
on 

चाहत ही तो है
कर देती है आहत
बहुत खूब

 

लोकप्रिय पोस्ट

पोस्ट गणना

FeedBurner FeedCount

यहाँ भी हैं

ईंडी ब्लागर

लेबल

शिल्पकार (94) कविता (65) ललित शर्मा (56) गीत (8) होली (7) -ललित शर्मा (5) अभनपुर (5) ग़ज़ल (4) माँ (4) रामेश्वर शर्मा (4) गजल (3) गर्भपात (2) जंवारा (2) जसगीत (2) ठाकुर जगमोहन सिंह (2) पवन दीवान (2) मुखौटा (2) विश्वकर्मा (2) सुबह (2) हंसा (2) अपने (1) अभी (1) अम्बर का आशीष (1) अरुण राय (1) आँचल (1) आत्मा (1) इंतजार (1) इतिहास (1) इलाज (1) ओ महाकाल (1) कठपुतली (1) कातिल (1) कार्ड (1) काला (1) किसान (1) कुंडलियाँ (1) कुत्ता (1) कफ़न (1) खुश (1) खून (1) गिरीश पंकज (1) गुलाब (1) चंदा (1) चाँद (1) चिडिया (1) चित्र (1) चिमनियों (1) चौराहे (1) छत्तीसगढ़ (1) छाले (1) जंगल (1) जगत (1) जन्मदिन (1) डोली (1) ताऊ शेखावाटी (1) दरबानी (1) दर्द (1) दीपक (1) धरती. (1) नरक चौदस (1) नरेश (1) नागिन (1) निर्माता (1) पतझड़ (1) परदेशी (1) पराकाष्ठा (1) पानी (1) पैगाम (1) प्रणय (1) प्रहरी (1) प्रियतम (1) फाग (1) बटेऊ (1) बाबुल (1) भजन (1) भाषण (1) भूखे (1) भेडिया (1) मन (1) महल (1) महाविनाश (1) माणिक (1) मातृशक्ति (1) माया (1) मीत (1) मुक्तक (1) मृत्यु (1) योगेन्द्र मौदगिल (1) रविकुमार (1) राजस्थानी (1) रातरानी (1) रिंद (1) रोटियां (1) लूट (1) लोकशाही (1) वाणी (1) शहरी (1) शहरीपन (1) शिल्पकार 100 पोस्ट (1) सजना (1) सजनी (1) सज्जनाष्टक (1) सपना (1) सफेदपोश (1) सरगम (1) सागर (1) साजन (1) सावन (1) सोरठा (1) स्वराज करुण (1) स्वाति (1) हरियाली (1) हल (1) हवेली (1) हुक्का (1)