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गुगल बाबा

इंडी ब्लागर

 

एक शुन्य आ गया जीवन में!!!

घनघोर
तम में
दीप जल उठे
परिंदे चहक उठे
फिर से चमन में
बहारें एक बार
फिर से लौटी हैं
जब से बहारें आई
अपने साथ
इन्द्रधनुषी 
रंगीनियाँ भी लाइ
रातों को 
मदहोश किया
कुछ देर वक्त को रोका
एक शुन्य आ गया जीवन में
दीप बुझ चुके थे
बहारें चली गयी थी
चमन के दिल चूर हुआ था
इस कठिन वक्त में 
मैंने बहुत संघर्ष किया है
बुझे दीपों में 
अपना खून जलाया
चमन को आंसुओं से सींचा
मेरी दुनिया अँधेरे में थी
उसे उजाले में खींचा 
जीवन में एक शुन्य आ गया 
शुन्य,
शुन्य में कितना अंतर

आपका 
शिल्पकार

Comments :

11 टिप्पणियाँ to “एक शुन्य आ गया जीवन में!!!”
Ratan Singh Shekhawat ने कहा…
on 

बहुत ही शानदार !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…
on 

मैंने बहुत संघर्ष किया है
बुझे दीपों में
अपना खून जलाया
चमन को आंसुओं से सींचा
मेरी दुनिया अँधेरे में थी
उसे उजाले में खींचा
जीवन में एक शुन्य आ गया
शुन्य,
शुन्य में कितना अंतर

शून्य का अन्तर बहुत ही प्रभावशाली रहा!

जी.के. अवधिया ने कहा…
on 

सुन्दर अभिव्यक्ति!

दिन के बाद रात और रात के बाद दिन तो होता ही है ललित जी! आज यदि शून्य है तो कल वह शून्य नहीं रहेगा।

राजीव तनेजा ने कहा…
on 

ज़िन्दगी की यही रीत है...हार के बाद ही जीत है...


बहुत बढिया

खुशदीप सहगल ने कहा…
on 

दिये जलते हैं,
फूल खिलते हैं...
दुनिया में दोस्त,
बड़ी मुश्किल से मिलते हैं...

जय हिंद...

पी.सी.गोदियाल ने कहा…
on 

मैंने बहुत संघर्ष किया है

बुझे दीपों में

अपना खून जलाया

चमन को आंसुओं से सींचा

मेरी दुनिया अँधेरे में थी

उसे उजाले में खींचा

जीवन में एक शुन्य आ गया

शुन्य,

शुन्य में कितना अंतर

बहुत खूब, लाजबाब ख्याल ललित जी !
वैसे हलके फुल्के मजाक के तौर पर यह भी कहना चाहूंगा की उस शून्य से पहले एक लगाने की कोशिश कीजिये शून्य खुद व खुद गायब हो जाएगा !

निर्मला कपिला ने कहा…
on 

सुन्दर अभिव्यक्ति है। शून्य मे भी बहुत श्क्ति होती है। इस शून्य मे ही तो हम भगवान को देखते हैं खुउद की पहचान और दुनिया की पहचान इसी शून्य मे होती है। तभी जीवन को जान कर आगे बढते हैं शुभकामनायें

दिगम्बर नासवा ने कहा…
on 

शून्य में ही सब एककार होना है ...... अनुपम रचना .......

kshama ने कहा…
on 

Dua karti hun,ki, jeevan me shoony na rahe..khizake baad baharen zaroor aayen!

AlbelaKhatri.com ने कहा…
on 

na keval sundar aur soumy

balki sateek aur saargarbhit kavita....

badhai !

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…
on 

बहुत ही बढिया लगी ये रचना......

 

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