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गुगल बाबा

इंडी ब्लागर

 

मुझे जरुरत है तुम्हारे स्नेह मंत्र से अभिमंत्रित स्वेटर की !!!!!

मै जान जाता था 
कि अब सर्दी आने वाली है
जब देखता था 
तुम्हारे हाथों में 
सलाई और ऊन की गेंद
दिन भर के
घर के काम से
अवकाश पाते ही 
तुम बुनने लगती थी 
मेरे लिए स्वेटर 
अपने नेह पूरित 
फंदे डाल कर
बुनती थी 
हर फंदे के साथ
अपनी दुवाएं 
जो सिर्फ मेरे लिए और
सिर्फ मेरे लिए ही होती थी
तुम्हारे स्नेह मंत्र से 
अभिमंत्रित स्वेटर को 
मै स्कुल जाता था पहनकर
तो पंख उग आते थे मेरे
ऐसा लगता था 
मैं घर से उड़ कर 
स्कुल पहुँच गया हूँ
यूँ लगता था जैसे
तुम्हारे आंचल में 
सिमटा हुआ हूँ मै 
कछुए जैसे 
हाथ-पैर सिकोड़ कर
सर पर है मेरे तुम्हारा आँचल
उसकी की गर्मी से
जाड़ा कोसों दूर भागता था
किसी विजयी योद्धा की तरह
मै सीना तान कर चलता था
जैसे यह स्वेटर नहीं 
"बुलेट प्रूफ जैकेट" है
दुनिया की बुरी नजर 
और सारी अनहोनियों 
से बचाता था मुझे
माँ तुम ही हो 
दुनिया की प्रथम
"आल फ्रूफ जैकेट"
की अविष्कार कर्ता
सर्दियाँ फिर आ गई हैं 
मुझे जरुरत है
तुम्हारे स्नेह मंत्र से 
अभिमंत्रित स्वेटर की 
तुम कहाँ हो माँ ?
माँsssssssssssss!!!


आपका 
शिल्पकार

Comments :

21 टिप्पणियाँ to “मुझे जरुरत है तुम्हारे स्नेह मंत्र से अभिमंत्रित स्वेटर की !!!!!”
Kusum Thakur ने कहा…
on 

माँ के स्नेह की कोई सीमा ही नहीं है , बहुत अछि अभिव्यक्ति . आभार !

Udan Tashtari ने कहा…
on 

ओह्ह!! भावुक कर गये आप आज!!


जाने कहाँ है..मैं भी पुकारता हूँ..ठंड आ गई है!!

Unknown ने कहा…
on 

अत्यन्त भावपूर्ण अभिव्यक्ति!

ऐ माँ तेरी सूरत से अलग भगवान की सूरत क्या होगी ...

शरद कोकास ने कहा…
on 

मुझे बरसों पुराना वो दृश्य याद आ गया मै जब कंचे खेल रहा था और माँ सलाई में फँसा आधा बुना स्वेटर मेरी पीठ पर रख कर कह रही थी " अरे तनिक सीधे तो बैठ ..नाप लेना है ..।"
फिर धीरे धीरे .. इन अनुभूतियों के पात्र बदलते गये .. वो एक अलग कहानी है ।

पी.सी.गोदियाल "परचेत" ने कहा…
on 

मार्मिक और भावपूर्ण रचना ललित जी !

निर्मला कपिला ने कहा…
on 

बहुत भावमय और मार्मिक अभिव्यक्ति शुभकामनायें

रंजू भाटिया ने कहा…
on 

माँ के हाथो की दुआ उतर जाती है इन बुने हुए फंदों में .बेहद खूबसूरत रचना लगी यह शुक्रिया

संगीता पुरी ने कहा…
on 

दिल से लिखी गयी रचना !!

वाणी गीत ने कहा…
on 

माँ की स्नेहमय स्मृतियों को सजीव कर दी है इस कविता ने ...!!

M VERMA ने कहा…
on 

मुझे जरुरत है
तुम्हारे स्नेह मंत्र से
अभिमंत्रित स्वेटर की
तुम कहाँ हो माँ ?
वाकई माँ के स्नेहिल हाथो से बुने स्वेटर की बात ही कुछ और है. भावुक कर देने वाली रचना

मनोज कुमार ने कहा…
on 

मै सीना तान कर चलता था

जैसे यह स्वेटर नहीं

"बुलेट प्रूफ जैकेट" है

दुनिया की बुरी नजर

और सारी अनहोनियों

से बचाता था मुझे

माँ तुम ही हो

दुनिया की प्रथम

"आल फ्रूफ जैकेट"

की अविष्कार कर्ता

बहुत भावुक कर देने वाली रचना। कई बीते पल याद आ गए।

अनिल कान्त ने कहा…
on 

भावुक कर दिया जी

अजय कुमार ने कहा…
on 

भावुक , यथार्थपरक, माँ के स्नेह से ओत प्रोत रचना , बधाई

Pawan Upadhyay ने कहा…
on 

wah sharma ji gajab abhi to maatra swetor wali maa hi padh paaya hoon sach me is thand me maa ki buni swetor ki garmahat mahsoos karne laga .

राजीव तनेजा ने कहा…
on 

पुराने दिनों की याद दिला भावुक कर दिया आपने

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…
on 

बेहतरीन भावाभिव्यक्ति ललित जी, शुभकामनाएं... अर घणी राम-राम..

सूर्यकान्त गुप्ता ने कहा…
on 

बहुत सुन्दर महराज जी
गुरु की महिमा तो अपार है
यही कारण है कि "गुरु गोविन्द दोनों खड़े काके लागूं पाय"
कि अगली पंक्ति तो याद नहीं कर पा रहा हूँ पर इसमें
गुरु को ही बड़ा माना गया है क्योंकि वही गोविन्द तक
पहुचने का मार्ग प्रशस्त करते हैं.
और एक बात " गुरु बिन ज्ञान भेद बिन चोरी"
जहाँ नहीं तहं थोड़ी थोड़ी

संध्या शर्मा ने कहा…
on 

सच है माँ के प्यार जैसी "बुलेट प्रूफ जैकेट" कभी नहीं बन सकती... माँ की ममता छलक रही है शब्दों से...

GK Khoj ने कहा…
on 

Leopard in Hindi
Titanic Jahaj
Cat in Hindi
Elephant in Hindi
Tree in Hindi
Jupiter in Hindi

GK Khoj ने कहा…
on 

Parrot in Hindi
Rabbit in Hindi
Saturn in Hindi
Tortoise in Hindi
Sparrow in Hindi

GK Khoj ने कहा…
on 

Uranus in Hindi
Sun in Hindi
Mercury in Hindi
Technology in Hindi
Venus in Hindi
Cow in Hindi

 

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