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गुगल बाबा

इंडी ब्लागर

 

जीत लिया युद्ध!




कोहरे का कहर
टिक ना सका
धरती पर
छोटी-छोटी
किरणो ने
एक होकर
जीत लिया युद्ध
अंधेरे से
सुर्योदय हुआ




आपका 
शिल्पकार

Comments :

9 टिप्पणियाँ to “जीत लिया युद्ध!”
Ratan Singh Shekhawat ने कहा…
on 

बढ़िया :)

Udan Tashtari ने कहा…
on 

रश्मि किरणों को इस विजय की बधाई...राहत का अहसास!!



ये गुलाब के फूल जरा अलग कर लें...कविता का महौल और मौसम गड़बड़ा देते हैं. :)

पी.सी.गोदियाल ने कहा…
on 

बहुत खूब ललित जी , हर रात के बाद एक सुनहली भोर आती है

ताऊ रामपुरिया ने कहा…
on 

छोटे छोटे लोग जब एक हो जाते हैं तभी क्रांति हो जाती है फ़िर कोहरे की तो औकात क्या है?

रामराम.

ताऊ रामपुरिया ने कहा…
on 

गुलाबों की बारिश आज कुछ ज्यादा ही तेज है.:)

रामराम.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…
on 

सुन्दर क्षणिका!
बधाई!

henry J ने कहा…
on 

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राज भाटिय़ा ने कहा…
on 

बहुत सुंदर रचना जी

मनोज कुमार ने कहा…
on 

बेहतरीन। बधाई।

 

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