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ये राजनितिक संकट की घडी है !!!

शासकीय अधिकारों का विकेन्द्री करण हमेश ऐसी समय खड़ी करता है कि एक छोटा सा काम भी होना कितना कठिन हो जाता है. एक आम आदमी तो थक कर घर में ही बैठ जाता है. एक कविता है आपसे आशीर्वाद चाहूँगा.




राजा की जान
तोते में 
तोते की जान
मैना में 
मैना की जान 
कौवे मे 
कौवे की जान 
घोंसले में 
घोंसले में सांप है 
सबकी जान 
अटकी पड़ी है  
ये राजनितिक 
संकट की घडी है 


आपका 
शिल्पकार, 

Comments :

9 टिप्पणियाँ to “ये राजनितिक संकट की घडी है !!!”
Udan Tashtari ने कहा…
on 

बहुत जबरदस्त!! बहुत उम्दा रचना...नोट हो गई!!

Suman ने कहा…
on 

nice

ताऊ रामपुरिया ने कहा…
on 

गजब कर दिया भाई, बहुत ही उम्दा रचना.

रामराम.

पी.सी.गोदियाल ने कहा…
on 

और घड़ी दीवार पर टंगी है :)

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari ने कहा…
on 

खतरनाक स्थिति है घोंसले में सांप है.


नेवले को बुलाओ भाई.

suryakant gupta ने कहा…
on 

वाह वाह बहुत खूब
"घोंसले में सांप है"
सांप तो फिर भी उन्हें छेड़ने से डसते हैं
आज के raaj neetigya तो desh ki
durdasha door karne के bajaay
gulchharre udate aur hanste हैं.

राज भाटिय़ा ने कहा…
on 

क्या बात है जी ,बहुत सुंदर

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…
on 

आजकल के हालात का सटीक चित्रण!

गिरिजेश राव ने कहा…
on 

क्या बात है!
..नितिक को ..नीतिक कर लें।

 

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