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गुगल बाबा

इंडी ब्लागर

 

कहे कवि सुनो तब नानी याद आ जाये

जब  भंग  सर चढ़ जाये होते उलटे काम
श्यामलाल  के  घर में घुसे होलिया राम
घुसे  होलिया  राम  जमकर हुयी पिटाई 
सर  भी  फुट  गया और टांगे भी तुडवाई 
कहे  कवि  सुनो  तब नानी याद आ जाये
टूटे फूटे पंहुचे घर जब भंग सर चढ़ जाये

आपका 
शिल्पकार
   

Comments :

7 टिप्पणियाँ to “कहे कवि सुनो तब नानी याद आ जाये”
जी.के. अवधिया ने कहा…
on 

इसीलिये तो हम भंग नहीं छानते, सिर्फ व्हिस्की से काम चला लेते हैं!

पी.सी.गोदियाल ने कहा…
on 

सच में बहुत बुरी चीज है, एक बार पी थी होली पर, सब कुछ उड़ता हुआ नजर आ रहा था उस ज़माने में स्टोव खूब चलते थे ! किचन में स्टोव जल रहा था और मुझे लगा कि यह उड़ने वाला है और मैंने ....

Anil Pusadkar ने कहा…
on 

तो फ़िर इस गाने का क्या करे,

भंग का रंग जमा हो चकाचक,फ़िर लो पान चबाये,
ऐसा झटका लगे जीया मे,पुनर्जनम हुई जाये।

Nirmla Kapila ने कहा…
on 

बदिया शुभकामनायें

AlbelaKhatri.com ने कहा…
on 

maze karaa diye ji..........

Murari Pareek ने कहा…
on 

sachmuchh naani nahi parnani yaad dila deti hai bhang!!!

M VERMA ने कहा…
on 

भंग चढ जाये तो कभी कभार अंग भंग भी हो जाये

 

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