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गुगल बाबा

इंडी ब्लागर

 

एक भीख मांगता बच्चा

एक सप्ताह के अवकाश के बाद आज पुनः एक कविता प्रस्तुत है.


धुप में
झुलसता हुआ
रेत की आग में
जलता हुआ
एक भीख मांगता बच्चा


करुण स्वर में
पुकार कर
दर्शनार्थियों को 
आकर्षित करता
एक भीख मांगता बच्चा


वक्त के 
क्रूर चक्र में
भाग्य रेखाओं की
उलझन में
उलझा हुआ 
एक भीख मांगता बच्चा


अपंगता का 
वरदान लिए
भाग्य में श्राप लिए
आसमान की ओर निहारता
एक भीख मांगता बच्चा

आपका 
शिल्पकार

Comments :

14 टिप्पणियाँ to “एक भीख मांगता बच्चा”
श्यामल सुमन ने कहा…
on 

भीख माँगते बच्चों की है शब्दों में तस्वीर।
ललित बनाया दृश्य कारुणिक सुमन हृदय में पीर।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

Udan Tashtari ने कहा…
on 

अपंगता का
वरदान लिए

उफ्फ!! क्या तस्वीर उकेरी है...सीना भेद गई!!

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…
on 

वाह ! बढ़िया तस्वीर उकेरी है |

जी.के. अवधिया ने कहा…
on 

ललित जी, आपकी इस कविता ने 'निराला' जी की भिक्षुक की याद दिला दीः

वह आता –
दो ड़ूक कलेजे के करता, पछताता, पथ पर आता।
पेट-पीठ दोनों मिलकर हैं एक,
चल रहा लकुटिया टेक,
मुट्ठी-भर दाने को, भूख मिटाने को ....

पी.सी.गोदियाल ने कहा…
on 

अपंगता का

वरदान लिए

भाग्य में श्राप लिए

आसमान की ओर निहारता

एक भीख मांगता बच्चा



ati sundar lalit jee !

Anil Pusadkar ने कहा…
on 

गज़ब का श्ब्द चित्र्।सुबह-सुबह सेंटी कर दिया ललित भाई।

Mired Mirage ने कहा…
on 

बहुत मार्मिक कविता!
घुघूती बासूती

मनोज कुमार ने कहा…
on 

वक्त के

क्रूर चक्र में

भाग्य रेखाओं की

उलझन में

उलझा हुआ

एक भीख मांगता बच्चा


कमर पे हाथ मुफलिसी के, खड़े होने पर
टिके जो भूख, बचपना जवान कैसे हो।

M VERMA ने कहा…
on 

बहुत दारूण चित्रण है आपकी रचना.
अपंगता का वरदान कभी कभी आरोपित भी किया जाता है भिखारी माफियाओ के द्वारा

ताऊ रामपुरिया ने कहा…
on 

धुप में
झुलसता हुआ
रेत की आग में
जलता हुआ
एक भीख मांगता बच्चा

अत्यंत मार्मिक.

रामराम.

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…
on 

ek sarthak prsang darshaya hai aapne apane sundar kavita ke madhyam se..

bahut badhiya sanvedanaon se bhari sundr kavita..badhayi

महफूज़ अली ने कहा…
on 

saarthak aur maarmik kavita ......bahut achchi lagi.....

Rekhaa Prahalad ने कहा…
on 

Lalit ji aapke rachana na 'Niralaji' ki kavita bhikshuk ki yaad dila di jise maine school me padhi thi. unki ye pankatiya abhi bhi mujhe yaad hai.
"chaat rahe hain joothi pattal
kahin sadak pe khade hue
aur jhapat lene ko unse
kutte bhi hain ade hue"

kshama ने कहा…
on 

Yah rachana to haihi achhee lekin galee walee behad achhee hai...

apnee raksha ke liye swayam ko jagruk rahna zarooree hai...hamare saath,saath jo hamare rakshak hai unkee bhee to jaan ko khatra hota hi hai..aur wo jabaaz bhi hain...hamne apnee ankhose pichhali 26 Nov. ko dekha,haina? Nihatte pandurang ne kasab ko nahee chhoda...!Apna pet chhalnee kar liya..!

 

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