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मोहन खेलै होरी------होली का रंग-चढ़ गई भंग..........ललित शर्मा ........

फागुन का मौसम है और होली अब कदम बढाते हुए दरवाजे तक पहुँच गई है. हमारे ग्रामांचल में कृष्ण और राधा के होली के फाग गए जाते हैं. गोपियों संग खेली कृष्ण की होली मशहूर है. होली के इर्द-गिर्द बैठ कर जब नगाड़ों की धुन के साथ ये फाग गाये जाते हैं वातावरण होलीमय हो जाता है. ऐसा ही एक गीत परंपरा से हमारे यहाँ गाया जाता है. आप भी आनंद लीजिये..........

मोहन खेलै होरी, मोहन खेलै होरी,
चलो वृषभान के दुलारी

काखर भिंज गै लहँगा,
काखर सारी, काखर सारी
काखर भिंज गै चुनरिया
कौन रंग मारी, कौन रंग मारी
चलो वृषभान के दुलारी

राधा के भिंज गै लहँगा,
ललिता के सारी, ललिता के सारी
चन्द्रावली के चुनरिया
मोहन रंग मारी, मोहन रंग मारी
चलो वृषभान के दुलारी

प्रस्तुतकर्ता 
शिल्पकार, 

Comments :

13 टिप्पणियाँ to “मोहन खेलै होरी------होली का रंग-चढ़ गई भंग..........ललित शर्मा ........”
Udan Tashtari ने कहा…
on 

वाह वाह!! गा और देते ललित भाई तो आनन्द दूना हो जाता. :)

RaniVishal ने कहा…
on 

Behad sundar prastuti....Aabhar!!

मनोज कुमार ने कहा…
on 

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

Mithilesh dubey ने कहा…
on 

क्या बात है ललित भईया , एक से बढ़कर एक रोज ही धमाका कर रहे हैं ।

अमिताभ मीत ने कहा…
on 

वाह ! बहुत बढ़िया.

ताऊ रामपुरिया ने कहा…
on 

वाह बहुत शानदार.

रामराम.

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…
on 

आप तो रस की गंगा बहा दिए हैं,लाजवाब.

गिरीश पंकज ने कहा…
on 

amar lok geet hai yah. lok geet amar hi rahate hai. prem me pagaa geet ab is baar holi khelane ka man ho raha hai..

Dr Satyajit Sahu ने कहा…
on 

मोहन रंग मारी ,वाह मोहन के ख्याल से होली रंगीली हो जाती है

vikas ने कहा…
on 

sahi kah rahe hain Udan Tashtri ji
bus gaa diye hote to such me maza doguna ho jata.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…
on 

लट्ठमार होली की बधाई!

यशवन्त मेहता "फ़कीरा" ने कहा…
on 

होली के रंग
महुआ के संग

राज भाटिय़ा ने कहा…
on 

बहुत सी बधाई इस लठ मार होली की जी

 

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