शिल्पकार. Blogger द्वारा संचालित.

चेतावनी

इस ब्लॉग के सारे लेखों पर अधिकार सुरक्षित हैं इस ब्लॉग की सामग्री की किसी भी अन्य ब्लॉग, समाचार पत्र, वेबसाईट पर प्रकाशित एवं प्रचारित करते वक्त लेखक का नाम एवं लिंक देना जरुरी हैं.
स्वागत है आपका

गुगल बाबा

इंडी ब्लागर

 

हमने लगाना चाहा मुहब्बत का शजर!!

हमने लगाना चाहा मुहब्बत का शजर
मौसम मे किसने घोला है  बहुत जहर
मामला संगीन हुआ वो लाए हैं खंजर
पता नही कब दिखाए लहुलुहान मंजर


बहुत ख़ामोशी होती है तूफान के पहले
लावा पिघलता ही है फौलाद के पहले 
छल करने वालों ने क्या सोचा है कभी 
अंगारे सुलगते हैं कहीं, आग के पहले 


देखो कोई वार पर तुरंत प्रहार करता है
कोई उचित समय का इंतजार करता है
जो खड़ा है साक्षी बनकर रणक्षेत्र  में
इतिहास उसका भी सत्कार करता है

आपका 
शिल्पकार    

Comments :

26 टिप्पणियाँ to “हमने लगाना चाहा मुहब्बत का शजर!!”
अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी ने कहा…
on 

देखो कोई वार पर तुरंत प्रहार करता है
कोई उचित समय का इंतजार करता है
जो खड़ा है साक्षी बनकर रणक्षेत्र में
इतिहास उसका भी सत्कार करता है |
.
---- लेकित कुछ तटस्थताओं को अपराध भी माना गया है ,,
दिनकर --- '' जो तटस्थ है समय लिखेगा उनका भी अपराध '' !
सुन्दर कविता ! आभार ,,,

खुशदीप सहगल ने कहा…
on 

देखो कोई वार पर तुरंत प्रहार करता है,
कोई उचित समय का इंतजार करता है,
जो खड़ा है साक्षी बनकर रणक्षेत्र में,
इतिहास उसका भी सत्कार करता है...

आ देखे ज़रा, किसमें कितना है दम,
जम के रखना कदम, मेरे साथिया...

जय हिंद...

राजीव तनेजा ने कहा…
on 

कसी हुई सशक्त कविता

जी.के. अवधिया ने कहा…
on 

"जो खड़ा है साक्षी बनकर रणक्षेत्र में
इतिहास उसका भी सत्कार करता है"

बहुत अच्छे!

HARI SHARMA ने कहा…
on 

बहुत ख़ामोशी होती है तूफान के पहले
लावा पिघलता ही है फौलाद के पहले
छल करने वालों ने क्या सोचा है कभी
अंगारे सुलगते हैं कहीं, आग के पहले

बहुत बढिया गज़ल है बार बार पढने का मन करता है

महफूज़ अली ने कहा…
on 

वाह! बहुत खूब....... आपने तो निःशब्द कर दिया...

Kulwant Happy ने कहा…
on 

महाराज की जय।
हिन्दी की जय।

श्यामल सुमन ने कहा…
on 

जो खड़ा है साक्षी बनकर रणक्षेत्र में
इतिहास उसका भी सत्कार करता है |

वाह वाह ललित भाई। बहुत सुन्दर भाव

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल' ने कहा…
on 

Guru mice sudharva lo

गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल' ने कहा…
on 

http://savysachi.mypodcast.com/2010/02/Shri_Rajiv_Taneja-282601.html

ललित शर्मा ने कहा…
on 

@ गिरीश भाई,
यहां पर विज्ञापन शुल्क लगता है।
इसलिए शुल्क देकर ही विज्ञापन करें।
शुल्क तालिका के लिए सम्पर्क करे।:)

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…
on 

ये मुहब्बत का शजर फूले-फले और आपको ऊर्जा प्रदान करे!

गिरीश पंकज ने कहा…
on 

achchhi-sarthak koshish hai...

वाणी गीत ने कहा…
on 

उचित समय कर इन्तजार करता है या तुरंत प्रहार करता है ...इंसान वही जो वार का प्रतिकार करता हैं ...!!

Anil Pusadkar ने कहा…
on 

बढिया है ललित बाबू।

sangeeta swarup ने कहा…
on 

छल करने वालों ने क्या सोचा है कभी
अंगारे सुलगते हैं कहीं, आग के पहले


बहुत सशक्त कविता....लेखन शैली ने विशेष छाप छोड़ी है..

ताऊ रामपुरिया ने कहा…
on 

बहुत गजब का लिखा. शुभकामनाएं.

रामराम.

विचारों का दर्पण ने कहा…
on 

लाजवाब ....लिखा आपने

रवि कुमार, रावतभाटा ने कहा…
on 

इस बार थोड़ा ज्यादा ही गजब किये हैं...

'अदा' ने कहा…
on 

bejod likhte hain aap ...!!

श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…
on 

.... प्रभावशाली व प्रसंशनीय रचना !!!

मनोज कुमार ने कहा…
on 

बहुत अच्छी कविता।

toshi gupta ने कहा…
on 

ललित जी आप तो निःशब्द कर देते है.............आपकी कविता स्वप्नलोक से यथार्थ कि यात्रा कराती है....

kshama ने कहा…
on 

देखो कोई वार पर तुरंत प्रहार करता है
कोई उचित समय का इंतजार करता है
जो खड़ा है साक्षी बनकर रणक्षेत्र में
इतिहास उसका भी सत्कार करता है
Kya baat hai!

सूर्यकान्त गुप्ता ने कहा…
on 
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
सूर्यकान्त गुप्ता ने कहा…
on 

तोर कल्पना शक्ति के
अउ शब्दकोष के कोई सानी नई ये
तेखर पाय के मोरो मन मा भाव आईस;
जो खड़ा है साक्षी बनकर रणक्षेत्र में
इतिहास उसका भी सत्कार करता है |
इन शब्दों के श्रृंगार को देख
ललित भाई का शब्द चयन
हममे उर्जा का संचार करता है

 

लोकप्रिय पोस्ट

पोस्ट गणना

FeedBurner FeedCount

यहाँ भी हैं

ईंडी ब्लागर

लेबल

शिल्पकार (94) कविता (65) ललित शर्मा (56) गीत (8) होली (7) -ललित शर्मा (5) अभनपुर (5) ग़ज़ल (4) माँ (4) रामेश्वर शर्मा (4) गजल (3) गर्भपात (2) जंवारा (2) जसगीत (2) ठाकुर जगमोहन सिंह (2) पवन दीवान (2) मुखौटा (2) विश्वकर्मा (2) सुबह (2) हंसा (2) अपने (1) अभी (1) अम्बर का आशीष (1) अरुण राय (1) आँचल (1) आत्मा (1) इंतजार (1) इतिहास (1) इलाज (1) ओ महाकाल (1) कठपुतली (1) कातिल (1) कार्ड (1) काला (1) किसान (1) कुंडलियाँ (1) कुत्ता (1) कफ़न (1) खुश (1) खून (1) गिरीश पंकज (1) गुलाब (1) चंदा (1) चाँद (1) चिडिया (1) चित्र (1) चिमनियों (1) चौराहे (1) छत्तीसगढ़ (1) छाले (1) जंगल (1) जगत (1) जन्मदिन (1) डोली (1) ताऊ शेखावाटी (1) दरबानी (1) दर्द (1) दीपक (1) धरती. (1) नरक चौदस (1) नरेश (1) नागिन (1) निर्माता (1) पतझड़ (1) परदेशी (1) पराकाष्ठा (1) पानी (1) पैगाम (1) प्रणय (1) प्रहरी (1) प्रियतम (1) फाग (1) बटेऊ (1) बाबुल (1) भजन (1) भाषण (1) भूखे (1) भेडिया (1) मन (1) महल (1) महाविनाश (1) माणिक (1) मातृशक्ति (1) माया (1) मीत (1) मुक्तक (1) मृत्यु (1) योगेन्द्र मौदगिल (1) रविकुमार (1) राजस्थानी (1) रातरानी (1) रिंद (1) रोटियां (1) लूट (1) लोकशाही (1) वाणी (1) शहरी (1) शहरीपन (1) शिल्पकार 100 पोस्ट (1) सजना (1) सजनी (1) सज्जनाष्टक (1) सपना (1) सफेदपोश (1) सरगम (1) सागर (1) साजन (1) सावन (1) सोरठा (1) स्वराज करुण (1) स्वाति (1) हरियाली (1) हल (1) हवेली (1) हुक्का (1)