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एक प्रार्थना है !!!!!(ललित शर्मा)

हम मानते हैं कि ईश्वर नाम की कोई अदृश्य शक्ति है जो इस संसार,चराचर जगत को चला रही है नियंत्रित कर रही है. पूरा ब्रह्माण्ड उसी के अधीन है. हम मानते हैं कि संसार की सत्ता के चलाने वाले वही हैं. हम सुखों और दुखों दोनों में उनको ही याद करते हैं. यह प्रार्थना मैंने बहुत पहले लिखी थी, आज आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ. कभी कभी मैं भी गुनगुना लेता हूँ. आप भी गुनगुनाइए तथा पसंद आये तो आशीष दीजिये. अगर कोई गा दे तो सोने में सुहागा समझुंगा।

प्रभु जी मन में अमन कर दो 
मेरे जीवन  में  लगन  भर  दो

राह   ऐसी   दिखाओ  प्रभु,  दुखियों  की  सेवा  हो
निर्बल को बल मिल जाये तेरे  प्रेम  की  मेवा  हो 
हम रहें समीप तुम्हारे,तुम  पास  गगन  कर  दो 


प्रभु जी मन में अमन कर दो 
मेरे जीवन  में  लगन  भर  दो

निर्धन  को  धन मिल जाये, योगी को बन मिल जाये
इस धरती का कर्ज उतारें,हमें ऐसा जनम मिल जाये
जल   जाएँ   सभी   दुर्गुण,  सांसों  में  अगन  भर  दो 


प्रभु जी मन में अमन कर दो 
मेरे जीवन  में  लगन  भर  दो

प्रेम हिरदय में भर जाये,तुम सबका जीवन हरसाओ
बाधाएं दूर हो  सबकी, तुम  ऐसी   करुणा   बरसाओ
जीवन  हो  सरल  सबका, काँटों   को  सुमन   कर  दो

प्रभु जी मन में अमन कर दो 
मेरे जीवन  में  लगन  भर  दो

आपका 
शिल्पकार


Comments :

29 टिप्पणियाँ to “एक प्रार्थना है !!!!!(ललित शर्मा)”
Mithilesh dubey ने कहा…
on 

वाह सर जी वाह , आप इतने मार्मिक हो पहली बार पता चला , लाजवाब कविता लिखी है आपने ।

राजीव तनेजा ने कहा…
on 

सुंदर प्राथना

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…
on 

प्रभु जी मन में अमन कर दो
मेरे जीवन में लगन भर दो
प्रभु जी मेरा ब्लॉग हिट करादो
प्रभु जी टिप्पणियों की भी बारिश करवा दो |

बढ़िया प्रार्थना :)

खुशदीप सहगल ने कहा…
on 

आमीन...

जय हिंद...

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…
on 

आमीन!

श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…
on 

...प्रार्थना ....प्रार्थना...बेहद प्रसंशनीय अभिव्यक्ति !!!

dhiru singh {धीरू सिंह} ने कहा…
on 

प्रात: स्मरणीय प्रार्थना . धन्यवाद

Udan Tashtari ने कहा…
on 

बहुत जबरदस्त...मैं गा देता मगर क्या बताऊँ गला साथ नहीं दे रहा है. :)

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…
on 

यह आपने ज़रूर इतनी बड़ी-बड़ी मूंछें रखने से पहले लिखी होगी :)

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…
on 

हुत ही सुन्दर प्रार्थना गीत है!
इसे गवाने का काम तो
अलबेला खत्री ही कर सकते हैं!

मैंने भी 30 गीत इनको भेज रखे हैं।
आप भी भेज दो!
क्यू में लग जायेगी!

निर्मला कपिला ने कहा…
on 

प्रभु जी मन में अमन कर दो
मेरे जीवन में लगन भर द
बहुत सुन्दर प्रार्थना है सही मे हर वक्त गुनगुनाने लायक है धन्यवाद्

HARI SHARMA ने कहा…
on 

प्रार्थना प्रभु से भगत का आत्मीय सम्वाद है
है भले खुद के लिये पर सभी का कल्याण है

लेने वाला लेते लेते थक भले जाये मगर
देने वाले प्रभू का तो सिर्फ़ दाता नाम है

Dr. Smt. ajit gupta ने कहा…
on 

योगी को बन मिल जाए, बन का अर्थ समझ नहीं आया। आपकी प्रार्थना अच्‍छी है।

जी.के. अवधिया ने कहा…
on 

"निर्धन को धन मिल जाये, योगी को बन मिल जाये
इस धरती का कर्ज उतारें,हमें ऐसा जनम मिल जाये
जल जाएँ सभी दुर्गुण, सांसों में अगन भर दो"

बहुत सुन्दर प्रार्थना!

ताऊ रामपुरिया ने कहा…
on 

बहुत सुंदर प्रार्थना. शुभकामनाएं.

रामराम.

पी.सी.गोदियाल ने कहा…
on 

राह ऐसी दिखाओ प्रभु, दुखियों की सेवा हो
निर्बल को बल मिल जाये तेरे प्रेम की मेवा हो
हम रहें समीप तुम्हारे,तुम पास गगन कर दो

प्रभु जी मन में अमन कर दो
मेरे जीवन में लगन भर दो
सुन्दर प्रार्थना ललित जी लेकिन ये तो सतयुग की बाते है आजकल घोर कलयुग चल रहा है !

Dr Satyajit Sahu ने कहा…
on 

ललित जी
प्यारी सरल और कालजयी कविता है
यही भारतीय जनमानस की कविता है सिर्फ साहित्यकारों के नहीं
बधाई

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…
on 

प्रभु जी मन में अमन कर दो
मेरे जीवन में लगन भर दो।।

वाह्! बहुत ही सुन्दर प्रार्थना!! एकदम मन को छू गई........

मनोज कुमार ने कहा…
on 

बेहतरीन प्रार्थना। लाजवाब।

ललित शर्मा ने कहा…
on 

@Dr. Smt. ajit gupta,

यहां पर बन का अर्थ साधना करने के लिए एकांत हेतु प्रयुक्त हुआ है।

वैसे बन-वन के अपभ्रंस के रुप मे स्थानीय बोली-भाषा मे प्रयुक्त होता है।

यशवन्त मेहता "सन्नी" ने कहा…
on 

सरल शब्दों से रचित मनभावन प्रार्थना......

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari ने कहा…
on 

बहुत सुन्दर कविता भैया.
कविताओ मे ईश्वर को पढना हमेशा आनन्ददायक लगता है. धन्यवाद.

Gagan Sharma, Kuchh Alag sa ने कहा…
on 

नहीं लगता कि प्रभू भी इसे टाल पायेंगे।

दीपक 'मशाल' ने कहा…
on 

बहूऊऊऊऊऊऊत ही खूबसूरत प्रार्थना ललित जी, पढ़ते ही गुनगुनाने का मन करने लगा..
जय हिंद.... जय बुंदेलखंड...

dipayan ने कहा…
on 

दिल से निकली प्रार्थना । अति सुन्दर भाव ।

राजकुमार ग्वालानी ने कहा…
on 

nice

'अदा' ने कहा…
on 

बहुत सुन्दर प्रार्थना है ललित जी,
भावमयी ...

वाणी गीत ने कहा…
on 

अब ये कविता पढने के बाद प्रभुजी कहाँ रुक पायेंगे ...चले ही आयेंगे आशीर्वाद देने ...
शुभ हो ...!!

सूर्यकान्त गुप्ता ने कहा…
on 

"निर्धन को धन मिल जाये, योगी को बन मिल जाये
इस धरती का कर्ज उतारें,हमें ऐसा जनम मिल जाये
जल जाएँ सभी दुर्गुण, सांसों में अगन भर दो"
यही तो अपना भी मन चाहता है.
जल जाएँ सभी दुर्गुण, सांसों में अगन भर दो"
दे ऐसा उपहार सभी को, दुनिया को मगन कर दो
लागिस के ललित भाई कतेक भावुक घलो हे

 

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