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प्रिय तेरी याद आई

जब
मौसम ने ली अंगड़ाई
बदरी ने झड़ी लगाई
सूरज ने आँखे चुराई
तब,प्रिय तेरी याद आई।

जब
अपनो ने की बेवफ़ाई
पवन ने अगन लगाई
घनघोर अमावश छाई
तब,प्रिय तेरी याद आई

जब,
निर्धनता बनी ठिठोली
कर्कश हुई मीठी बोली
सपनो ने सहेजा डेरा
तब,प्रिय तेरी याद आई

जब
दुश्मनों ने हाथ बढाए
ठग माथे चंदन लगाए
समय ने लगाया फ़ेरा
तब, प्रिय तेरी याद आई

जब
सीने में धड़का दिल
रोशनी हुई झिलमिल
जैसे आने लगा सवेरा
तब,प्रिय तेरी याद आई

जब
शिल्पकार भूल गया
ठक-ठक का मधुर गीत
पत्थरों से आता हुआ
तब,प्रिय तेरी याद आई


शिल्पकार

Comments :

37 टिप्पणियाँ to “प्रिय तेरी याद आई”
Mrs. Asha Joglekar ने कहा…
on 

वाह शिल्पकार के भावों को खूब उतारा है शब्दों में ।

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…
on 

बढ़िया अभिव्यक्ति

Sunil Kumar ने कहा…
on 

सुंदर भावाव्यक्ति बधाई

मो सम कौन ? ने कहा…
on 

ये तो महाराज, जब भी साँस आई - प्रिय तेरी याद आई, हो गया।
बहुत अच्छी पोस्ट लगी।

honesty project democracy ने कहा…
on 

बहुत सुन्दर सार्थक प्रस्तुती ..

हरीश ने कहा…
on 

सुंदर कविता-दिल से निकली कविता
आप इतना अच्छा कैसे लिख लेते हैं।
आप की बोर्ड तोड़ मेहनत करते हैं।

हरीश ने कहा…
on 

सुंदर कविता-दिल से निकली कविता
आप इतना अच्छा कैसे लिख लेते हैं।
आप की बोर्ड तोड़ मेहनत करते हैं।

हरीश ने कहा…
on 

सुंदर कविता-दिल से निकली कविता
आप इतना अच्छा कैसे लिख लेते हैं।
आप की बोर्ड तोड़ मेहनत करते हैं।

हरीश ने कहा…
on 

सुंदर कविता-दिल से निकली कविता
आप इतना अच्छा कैसे लिख लेते हैं।
आप की बोर्ड तोड़ मेहनत करते हैं।

हरीश ने कहा…
on 

सुंदर कविता-दिल से निकली कविता
आप इतना अच्छा कैसे लिख लेते हैं।
आप की बोर्ड तोड़ मेहनत करते हैं।

हरीश ने कहा…
on 

सुंदर कविता-दिल से निकली कविता
आप इतना अच्छा कैसे लिख लेते हैं।
आप की बोर्ड तोड़ मेहनत करते हैं।

हरीश ने कहा…
on 

सुंदर कविता-दिल से निकली कविता
आप इतना अच्छा कैसे लिख लेते हैं।
आप की बोर्ड तोड़ मेहनत करते हैं।

हरीश ने कहा…
on 

सुंदर कविता-दिल से निकली कविता
आप इतना अच्छा कैसे लिख लेते हैं।
आप की बोर्ड तोड़ मेहनत करते हैं।

हरीश ने कहा…
on 

सुंदर कविता-दिल से निकली कविता
आप इतना अच्छा कैसे लिख लेते हैं।
आप की बोर्ड तोड़ मेहनत करते हैं।

बी एस पाबला ने कहा…
on 

दुश्मनों ने हाथ बढाए
ठग माथे चंदन लगाए
समय ने लगाया फ़ेरा
तब, प्रिय तेरी याद आई

भावों को खूब उतारा है

हरीश ने कहा…
on 

आज आपको दिल से टिप्पणी देना का मन था

अब चलता हूँ फ़िर आउंगा।

ललित शर्मा-للت شرما ने कहा…
on 

@हरीश
ये तमाशा क्यों कर रहे हो।
तुम्हारे मित्र का हाल नहीं पता क्या?
जरा उनसे मिल लो तो पता चल जाएगा।
जरा देख लो कहीं सिगरेट केश और रुमाल तो नहीं भूल गए हो।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…
on 

यानि कि हर पल याद आई ...

बहुत खूबसूरत अभिव्यक्ति ...

पी.सी.गोदियाल ने कहा…
on 

जब
अपनो ने की बेवफ़ाई
पवन ने अगन लगाई
घनघोर अमावश छाई
तब,प्रिय तेरी याद आई
वाह , ललित जी बहुत सुन्दर , ऊपर से जब कम्वख्त मौसम ऐसा हो तो इंसान तो क्या पत्थरों को भी प्रियतम की याद सताने लगती है !

Mithilesh dubey ने कहा…
on 

कई तरह के भाव समेटे सुन्दर अभिव्यक्ति ।

ताऊ रामपुरिया ने कहा…
on 

सुंदर अभिव्यक्ति, शुभकामनाएं.

रामराम.

Udan Tashtari ने कहा…
on 

बहुत उम्दा रचना...

वन्दना ने कहा…
on 

बहुत ही सुन्दर भावाव्यक्ति।

शेफाली पाण्डे ने कहा…
on 

sundar rachna

Divya ने कहा…
on 

सुंदर भावाव्यक्ति बधाई

सुज्ञ ने कहा…
on 

होलै से भावो को स्पर्श किया
और शब्द अलंकृत हो गये।
क्या खूब शिल्प सज़ा है।

मन उद्देलित करने के लिये आभार्।

गुर्रमकोंडा नीरजा ने कहा…
on 

''शिल्पकार भूल गया
ठक-ठक का मधुर गीत
पत्थरों से आता हुआ''........तब तो याद आनी ही थी!

बधाई.

गिरिजेश राव ने कहा…
on 

ऐसे शिल्पकारों के स्पर्श से ही 'पत्थर गीत गाने लगते हैं।'

Babli ने कहा…
on 

बहुत सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ आपने शानदार रचना लिखा है! बधाई!

कुमार राधारमण ने कहा…
on 

प्रिय "प्रेम" है। प्रेम की अनुभूति महत्वपूर्ण है चाहे वह किसी बहाने हुई हो।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…
on 

आपकी पोस्ट रविवार २९ -०८ -२०१० को चर्चा मंच पर है ....वहाँ आपका स्वागत है ..

http://charchamanch.blogspot.com/

पवन धीमान ने कहा…
on 

जब,
निर्धनता बनी ठिठोली
कर्कश हुई मीठी बोली
सपनो ने सहेजा डेरा
तब,प्रिय तेरी याद आई
..बहुत सुन्दर... बहुत सार्थक

वाणी गीत ने कहा…
on 

मौसम , बदरी , सूरज , अमावस
किसने तेरी याद ना दिलाई
किस- किस तरह तेरी याद ना आई ...!

राणा प्रताप सिंह (Rana Pratap Singh) ने कहा…
on 

सुन्दर भावाभिव्यक्ति| प्रियतम की याद जाने कब कब आयी|

गिरीश बिल्लोरे ने कहा…
on 

आप अच्छा लिखते हैं सच गुरु मज़ा आ गया सुन्दर वाह

कविता रावत ने कहा…
on 

दुश्मनों ने हाथ बढाए
ठग माथे चंदन लगाए
समय ने लगाया फ़ेरा
तब, प्रिय तेरी याद आई
...बहुत सुन्दर सार्थक प्रस्तुती

Archana ने कहा…
on 

आपकी कविता सुनिए यहाँ -http://sanskaardhani.blogspot.com/

-धन्यवाद, अनुमति के लिए ....

 

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