जाग मुसाफिर नाव लगी हैं तुझे जाना हैं उस पारअरे छोड़ मोह कांकर पाथर का झटपट होले सवाररे बन्दे जाना भवपारइस नाव का नहीं किराया,सबका दाता हैं करतारजाते ही तुझको गले लगाए, वो ऐसा हैं भरताररे बन्दे जाना हैं भवपार जिस पर तुझको बड़ा गरब हैं ,वो नरतन हैं बेकारजिस दिन छोड़ जाएगा पंछी, वो पड़ा रहेगा बेकाररे बन्दे जाना हैं भवपारअब तक बैठा नाव पाथर की, तू डूबन को तैयार जब प्रियतम की नाव लगी हैं, कयूं डूबे मझधाररे बन्दे जाना हैं भवपार आपका शिल्पकार(फोटो गूगल से साभार)
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प्रियतम की नाव लगी हैं, कयूं डूबे मझधार
आचार्य ललित मुनि, रविवार, 20 सितंबर 2009
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