शनिवार, 13 नवम्बर 2010

तुलने लगे कुबेर भी अनुदान के लिए

हम लड़ रहे हैं मित्र दोना पान के लिए
भाड़े में भीड़ जुटती है सम्मान के लिए

क्या नहीं होता अब पूजा के नाम पर
बिक जाते हैं फ़रिश्ते अनुष्ठान के लिए

है खेल सियासत का कुर्सी के वास्ते
तुलने लगे कुबेर भी अनुदान के लिए

अपने उसुलों के लिए बागी हुए हैं हम
छोड़े हैं सिंहासन भी स्वाभिमान के लिए

माला गले में डालने की होड़ मची है
सब दौड़ रहे हैं झूठी पहचान के लिए

संदेह से घिरी हैं सारी उपाधियाँ
जीता है कौन धर्म और ईमान के लिए

इतने गरीब हो गए नवरंग इन दिनों
दो फ़ूल जुटा न पाए बलिदान के लिए

माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग'
कोरबा (छ ग)

10 टिप्पणियाँ:

गिरीश बिल्लोरे ने कहा…

हम लड़ रहे हैं मित्र दोना पान के लिए
भाड़े में भीड़ जुटती है सम्मान के लिए

क्या नहीं होता अब पूजा के नाम पर
बिक जाते हैं फ़रिश्ते अनुष्ठान के लिए
गज़ब माणिक जी को बधाइयां भेजिये हमारी

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

माला गले में डालने की होड़ मची है
सब दौड़ रहे हैं झूठी पहचान के लिए

बहुत बढ़िया ... बधाई प्रस्तुति के लिए आनंद आ गया ... वाह

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

संदेह से घिरी हैं सारी उपाधियाँ
जीता है कौन धर्म और ईमान के लिए

इतने गरीब हो गए नवरंग इन दिनों
दो फ़ूल जुटा न पाए बलिदान के लिए

बहुत बढ़िया गज़ल माणिक जी की ...

रानीविशाल ने कहा…

माला गले में डालने की होड़ मची है
सब दौड़ रहे हैं झूठी पहचान के लिए
बिलकुल सही ...
इतने गरीब हो गए नवरंग इन दिनों
दो फ़ूल जुटा न पाए बलिदान के लिए

वाह ! बेहद उम्दा ग़ज़ल प्रस्तुत करने के लिए बहुत धन्यवाद .

dhiru singh {धीरू सिंह} ने कहा…

वाह वाह

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

क्या नहीं होता अब पूजा के नाम पर
बिक जाते हैं फ़रिश्ते अनुष्ठान के लिए

है खेल सियासत का कुर्सी के वास्ते
तुलने लगे कुबेर भी अनुदान के लिए

बिलकुल सीधी बात कह दी सुंदर सटीक शब्दावली में.
उम्दा गज़ल.

शरद कोकास ने कहा…

वाह भाई । माणिक को बधाई ।

The guy sans voice ने कहा…

बहुत बढ़िया कृति . शुभकामना .

madansharma ने कहा…

क्या नहीं होता अब पूजा के नाम पर
बिक जाते हैं फ़रिश्ते अनुष्ठान के लिए..
सुंदर सटीक शब्दावली!

madansharma ने कहा…

बेहद उम्दा ग़ज़ल प्रस्तुत करने के लिए बहुत धन्यवाद .