रविवार, 21 मार्च 2010

आपने कल पढा था---आज सुनिए--"कोयलिया कुहु कुहु बोले ना"

ल आपसे वादा किया था कि माता का जसगीत आपको सुनाने का प्रयास करुंगा। मेरा प्रयास पुरा हुआ और मै उसे आपके लिए लाने में सफ़ल हुआ। छत्तीसगढ के भजन सम्राट दुकालु राम यादव के "राम लखन तोर जंवारा" से यह गाना लिया गया हैं। हम उन्हे धन्यवाद देते हैं कि छत्तीसगढ की संस्कृति का प्रचार कर रहे हैं। "कुहु कुहु बो्ले ना कोयलिया" को सीमा कौशिक जी ने गाया है प्रस्तुत है माता का जंवारा गीत--आप आनंद लिजिए-आपको पसंद आयेंगे तो मेरा प्रयास सार्थक हो जाएगा।



1.कुहु कुहु बोले ना कोयलिया--गायक सीमा कौशिक



दुकालु राम यादव जी से साभार
आपका
शिल्पकार

9 टिप्पणियाँ:

वाणी गीत ने कहा…

माता के इस गीत के लिए आभार ....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

जन्म-दिन की हार्दिक शुभकामनाएँ!

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

बेहतरीनऔर जन्मदिवस पर शुभकामनाएं.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

जमाई सा' को जन्मदिन की बधाई!
जन्म दिन पर शानदार और आनंददायक गीत सुनाने का आभार।

जी.के. अवधिया ने कहा…

वाह ललित जी! नवरात्रि में जसगीत सुनाकर तृप्त कर दिया आपने!

'अदा' ने कहा…

बहुत ही मधुर गीत सुनवाया आपने ललित जी..

और आज आपको आपके जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई..

राज भाटिय़ा ने कहा…

आप को जन्म-दिन की बधाई ओर हार्दिक शुभकामनाएँ!

vikas ने कहा…

मै गाना सुनते हुए कमेन्ट कर रहा हू आपका प्रयास बिल्कुल सार्थक हुआ,बेहद सुदर गीत .

VIKAS PANDEY

WWW.VICHAROKADARPAN.BLOGSPOT.COM

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत बढ़िया..आभार यह गीत सुनवाने का.