मंगलवार, 27 दिसम्बर 2011

ये तुम हो...?


11 टिप्पणियाँ:

संगीता पुरी ने कहा…

बढिया है ..
छोटी सी .. अहसास भरी .;
बधाई !!

संगीता पुरी ने कहा…

बढिया है ..
छोटी सी .. अहसास भरी .;

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

शानदार

Gyan Darpan
..

Rahul Singh ने कहा…

खूब गढ़ा है.

संध्या शर्मा ने कहा…

तुम नहीं तुम्हारा अहसास ही सही
पास नहीं आसपास ही सही...
बहुत खूबसूरत समर्पण भरे अहसास... शुभकामनाये

अनुपमा त्रिपाठी... ने कहा…

दर्द छुपा है इस शिल्प में ...
सुंदर रचना ...

वाणी गीत ने कहा…

सच यादें ही अच्छी !

अजय कुमार झा ने कहा…

तुमसे तो तुम्हारी याद ही अच्छी है ,
उफ़्फ़ जो ये कह दी आपने बात ही अच्छी है ..


शिल्पकार को हमारा अभिवादन

वन्दना ने कहा…

वाह सच मे याद ही अच्छी होती है कम से कम आस पास तो होती है।

चंद्रमौलेश्वर प्रसाद ने कहा…

कविता का रूप देखकर लगता है वो ‘अंटिला’ में छुपी है :)

गिरीश"मुकुल" ने कहा…

जी ये हम ही हैं..
बहुत खूबसूरत शर्मा जी वाह......