शिल्पकार. Blogger द्वारा संचालित.

चेतावनी

इस ब्लॉग के सारे लेखों पर अधिकार सुरक्षित हैं इस ब्लॉग की सामग्री की किसी भी अन्य ब्लॉग, समाचार पत्र, वेबसाईट पर प्रकाशित एवं प्रचारित करते वक्त लेखक का नाम एवं लिंक देना जरुरी हैं.
स्वागत है आपका

गुगल बाबा

इंडी ब्लागर

 

आया यौवन का ज्वार--एक गीत

रामेश्वर शर्मा जी छत्तीसगढ एक जाने माने कवि एवं साहित्यकार हैं। इन्होने कई छत्तीसगढी फ़िल्मों के लिए गीत लिखे हैं। हिन्दी और छत्तीसगढी में निरंतर लेखन कार्य करते हैं। साथ ही साथ भोजपुरी में भी लिखते हैं। इनकी साहित्य यात्रा एवं जीवन वृत्त बाद में लिखुंगा। पहले इनका एक गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ। प्रथम बार नेट पर रामेश्वर जी का काव्य शिल्पकार के माध्यम से प्रस्तूत हो रहा है। आशा है कि आपको मधुर गीत पसंद आएगा।



आया यौवन का ज्वार ।

पूर्वा के आंचल से झर-झर झर-झर झर-झर झरे फ़ूहार
नदी,नहर तालाब तलैया में, आया यौवन का ज्वार ।

जंगल-जंगल मुरझाया था, दहक रही थी माटी सारी,
वर्षा रानी आकर तुमने, सरसाई आत्मा की क्यारी,
जगह-जगह लहराता पानी,नाच उठा व्याकुल संसार

लगी फ़ड़कने भुजा कृषक की,बैलों का मन डोल उठा,
भूख मिटाने मानव की मेहनत का देखो जादु बोल उठा
लगे किसान मनाने में उल्लास, उमंगों के दिन चार

हीरा-मोती बो खेतों में, जीवन जोत जगाएंगें
अपनी पर परिवार सभी की,पीड़ा दूर भगाएंगे,
ऐसे उच्च विचारों में खो,बहा रहा श्रम-श्रम की धार।

बीजें बोकर फ़ल को पाना,है कितना विस्वास भरा,
मिट्टी में सन कुंदन बनने का, क्रम ही आदर्श खरा,
जहां उठा संकल्प वहां पर,फ़िर कैसा साथी अंधियार

पूर्वा के आंचल से झर-झर झर-झर झर-झर झरे फ़ूहार
नदी,नहर तालाब तलैया में, आया यौवन का ज्वार ।

विमोचन समारोह में काव्य पाठ

Comments :

15 टिप्पणियाँ to “आया यौवन का ज्वार--एक गीत”
जी.के. अवधिया ने कहा…
on 

रामेश्वर शर्मा जी के इस गीत को पढ़वाने के लिये धन्यवाद!

दिलीप ने कहा…
on 

bahutahi badhiya geet sirji...

ब्लाग बाबू ने कहा…
on 

भईय्या पढ लिया हूं अब खेलने जा रहा हूं???

pawan dhiman ने कहा…
on 

लगी फ़ड़कने भुजा कृषक की,बैलों का मन डोल उठा,
भूख मिटाने मानव की मेहनत का देखो जादु बोल उठा
.. यह रचना दिल को छू गई.....

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…
on 

शानदार...
ये ज्वार कभी भाटा न बने।
--------
ब्लॉगवाणी माहौल खराब कर रहा है?

girish pankaj ने कहा…
on 

vaah...rameshvar ji ko bhi le aaye. bhalaa kaam kiyaa. dhanyvaad. aise ekant-sadhakon se bhi parichay karate rahanaa .

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…
on 

बहुत बढ़िया गीत..अब तो बरखा का मौसम आने को ही है...

सूर्यकान्त गुप्ता ने कहा…
on 

हीरा-मोती बो खेतों में, जीवन जोत जगाएंगें
अपनी पर परिवार सभी की,पीड़ा दूर भगाएंगे, वास्तव मे अनाज हीरे मोती से बढ्कर हैं । एक छत्तीसगढी कविता लिखी गई थी हमारे मामाजी द्वारा जिसमे गेहूं और चने को क्रमशः पुखराज और मून्गे की सन्ग्या दी गई थी। कविता याद नही है। बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति।

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari ने कहा…
on 

आदरणीय रामेश्वर शर्मा जी से परिचय कराने के लिए बहुत बहुत धन्‍यवाद भईया. नेट में इनके संबंध में यह पहली विस्‍तृत जानकारी है.

PADMSINGH ने कहा…
on 

बीजें बोकर फ़ल को पाना,है कितना विस्वास भरा,
मिट्टी में सन कुंदन बनने का, क्रम ही आदर्श खरा,
जहां उठा संकल्प वहां पर,फ़िर कैसा साथी अंधियार
...... गाँव की मिटटी की भीनी सुबंध से ओत प्रोत सावन की फुहार जैसी रचना पढवाने के लिए आपका साधुवाद !!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…
on 

मंगलवार 15- 06- 2010 को आपकी रचना ... चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर ली गयी है


http://charchamanch.blogspot.com/

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…
on 

गीत पढ़कर तो
सचमुच यौवन का ज्वार आ गया!
--
आपसे परिचय करवाने के लिए संगीता स्वरूप जी का आभार!
--
आँखों में उदासी क्यों है?
हम भी उड़ते
हँसी का टुकड़ा पाने को!

ज्योत्स्ना पाण्डेय ने कहा…
on 

एक खूबसूरत गीत पढवाने के लिए शुक्रिया ललित जी...

शुभकामनाएं....

श्री श्री साढ़े सात हजार बाबा सांडनाथ !! ने कहा…
on 

waah warsha swagt gaan bahut badhiya!!

vedvyathit ने कहा…
on 

dhrti se judi rchnaye ab pdhne ko khan mil rhin hain
aap ne bda kam kiya hai
bdhai
ved vyathit

 

लोकप्रिय पोस्ट

पोस्ट गणना

FeedBurner FeedCount

यहाँ भी हैं

ईंडी ब्लागर

लेबल

शिल्पकार (94) कविता (65) ललित शर्मा (56) गीत (8) होली (7) -ललित शर्मा (5) अभनपुर (5) ग़ज़ल (4) माँ (4) रामेश्वर शर्मा (4) गजल (3) गर्भपात (2) जंवारा (2) जसगीत (2) ठाकुर जगमोहन सिंह (2) पवन दीवान (2) मुखौटा (2) विश्वकर्मा (2) सुबह (2) हंसा (2) अपने (1) अभी (1) अम्बर का आशीष (1) अरुण राय (1) आँचल (1) आत्मा (1) इंतजार (1) इतिहास (1) इलाज (1) ओ महाकाल (1) कठपुतली (1) कातिल (1) कार्ड (1) काला (1) किसान (1) कुंडलियाँ (1) कुत्ता (1) कफ़न (1) खुश (1) खून (1) गिरीश पंकज (1) गुलाब (1) चंदा (1) चाँद (1) चिडिया (1) चित्र (1) चिमनियों (1) चौराहे (1) छत्तीसगढ़ (1) छाले (1) जंगल (1) जगत (1) जन्मदिन (1) डोली (1) ताऊ शेखावाटी (1) दरबानी (1) दर्द (1) दीपक (1) धरती. (1) नरक चौदस (1) नरेश (1) नागिन (1) निर्माता (1) पतझड़ (1) परदेशी (1) पराकाष्ठा (1) पानी (1) पैगाम (1) प्रणय (1) प्रहरी (1) प्रियतम (1) फाग (1) बटेऊ (1) बाबुल (1) भजन (1) भाषण (1) भूखे (1) भेडिया (1) मन (1) महल (1) महाविनाश (1) माणिक (1) मातृशक्ति (1) माया (1) मीत (1) मुक्तक (1) मृत्यु (1) योगेन्द्र मौदगिल (1) रविकुमार (1) राजस्थानी (1) रातरानी (1) रिंद (1) रोटियां (1) लूट (1) लोकशाही (1) वाणी (1) शहरी (1) शहरीपन (1) शिल्पकार 100 पोस्ट (1) सजना (1) सजनी (1) सज्जनाष्टक (1) सपना (1) सफेदपोश (1) सरगम (1) सागर (1) साजन (1) सावन (1) सोरठा (1) स्वराज करुण (1) स्वाति (1) हरियाली (1) हल (1) हवेली (1) हुक्का (1)