शिल्पकार. Blogger द्वारा संचालित.

चेतावनी

इस ब्लॉग के सारे लेखों पर अधिकार सुरक्षित हैं इस ब्लॉग की सामग्री की किसी भी अन्य ब्लॉग, समाचार पत्र, वेबसाईट पर प्रकाशित एवं प्रचारित करते वक्त लेखक का नाम एवं लिंक देना जरुरी हैं.
रफ़्तार
स्वागत है आपका

गुगल बाबा

इंडी ब्लागर

 

काहे नेह लगाय!!!

मित्रों शिल्पकार दो दिनों तक कुछ लिख नहीं पाया क्योंकि गरमा गरम ही प्रस्तुत करने की आदत पड़ गई है. तुरंत लिखो और छाप दो. इन दिनों में मैंने टेम्पलेट बदला और इस पर अभी और भी काम बाकी है. पुराने टेम्पलेट के विषय में हमारे कई मित्रों ने शिकायत दर्ज कराई थी. यह ठीक से खुलता नहीं है  इससे लिखा हुआ दीखता नहीं है. इसे ही ध्यान में रख कर टेम्पलेट बदला गया है. अब कैसा है? कृपया अवगत कराएँ. इस अवसर पर एक नया "काया गीत" प्रस्तुत है. ब्लॉग का चोला तो बदल गया है. यह टेम्पलेट ( माटी का चोला) भी बदलना पड़ेगा . इसे बदलना उस परमेश्वर के हाथ है. इसलिए इसकी तैयारी भी आवश्यक ही हो जाती है.पता नहीं कब बुलावा आये, इस लिए चलने की तैयारी में यह गीत प्रस्तुत है. आपका आशीर्वाद चाहूँगा.  


हंसा जग है एक सराय
एक पल का ठहराव यहाँ पर काहे नेह लगाय

कोई  चलने की जल्दी में है कोई खड़ा राहों में
कोई  झांक रहा  झरोखे  से कोई पड़ा बाहों में
कोई  बतियाए  बालम  से  कोई  नैन  चुराय
हंसा जग है एक सराय
एक  पल  का ठहराव यहाँ पर काहे नेह लगाय

कोई  नाचे रोये गाये कोई सारंगी तान सुनाय
कहीं  मरघट  कहीं  जगमग  कोई धुनी  रमाय
खुब  लगा  मेला  जग  का देखे आँख न समाय
हंसा जग है एक सराय
एक पल का ठहराव यहाँ पर काहे नेह लगाय


तभी  एक  पल  की आँधी  ने कैसा रचा है खेला
सबका सब ही उजड़  गया बचा न एक भी धेला
दे दे किराया अपना प्राणी, काहे को ॠण चढ़ाय
हंसा जग है एक सराय
एक पल का ठहराव यहाँ पर काहे नेह लगाय


आपका
शिल्पकार

Comments :

11 टिप्पणियाँ to “काहे नेह लगाय!!!”
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…
on 

तभी एक पल की आँधी ने कैसा रचा है खेला
सबका सब ही उजड़ गया बचा न एक भी धेला
दे दे किराया अपना प्राणी, काहे को ॠण चढ़ाय
हंसा जग है एक सराय
एक पल का ठहराव यहाँ पर काहे नेह लगाय

गर्जना और वर्जना का सुन्दर संगम।
रचना बहुत बढ़िया है।

Unknown ने कहा…
on 

सही कहा है...

कोऊ काहू में मगन, कोऊ काहू में मगन ...

निर्मला कपिला ने कहा…
on 

सही बात है । ताज़ा परोसा अच्छा लगा। धन्यवाद्

ताऊ रामपुरिया ने कहा…
on 

हंसा जग है एक सराय
एक पल का ठहराव यहाँ पर काहे नेह लगाय


सही कहा आपने, पर नेह, राग विराग तो दिन प्रतिदिन बढता ही जारहा है? कोई उपाय महाराजजी?

रामराम.

M VERMA ने कहा…
on 

कोई बतियाए बालम से कोई नैन चुराय
हंसा जग है एक सराय
बेहतर ढंग से जीवन का कौतूहल उजागर हुआ है. नेह तो लग जाती है सायास कौन लगाता है.

राज भाटिय़ा ने कहा…
on 

बहुत सुंदर रचना, लेकिन लोग समझते कहा है, सब सात पिडियो तक का जोड कर रखते है

girish pankaj ने कहा…
on 

chola bhi achchha lag raha hai, aur rachana bhi...badhai. apni lalit-pratibha ka isi tarah parichay dete rahana....

Mithilesh dubey ने कहा…
on 

क्या बात है , लाजवाब लगा पढ़कर , बहुत खूब ।

संगीता पुरी ने कहा…
on 

बहुत बढिया !!

Pawan Kumar ने कहा…
on 

कोई संदेह नहीं शिल्पकार जी यह कलेवर पहले से ज्यादा प्रभावशाली है ......साथ ही कविता भी शानदार.....दोनों की बधाई!

36solutions ने कहा…
on 

सुन्‍दर टैम्‍पलेट व भावपूर्ण कायागीत. धन्‍यवाद.

 

लोकप्रिय पोस्ट

पोस्ट गणना

FeedBurner FeedCount

यहाँ भी हैं

ईंडी ब्लागर

लेबल

शिल्पकार (94) कविता (65) ललित शर्मा (56) गीत (8) होली (7) -ललित शर्मा (5) अभनपुर (5) ग़ज़ल (4) माँ (4) रामेश्वर शर्मा (4) गजल (3) गर्भपात (2) जंवारा (2) जसगीत (2) ठाकुर जगमोहन सिंह (2) पवन दीवान (2) मुखौटा (2) विश्वकर्मा (2) सुबह (2) हंसा (2) अपने (1) अभी (1) अम्बर का आशीष (1) अरुण राय (1) आँचल (1) आत्मा (1) इंतजार (1) इतिहास (1) इलाज (1) ओ महाकाल (1) कठपुतली (1) कातिल (1) कार्ड (1) काला (1) किसान (1) कुंडलियाँ (1) कुत्ता (1) कफ़न (1) खुश (1) खून (1) गिरीश पंकज (1) गुलाब (1) चंदा (1) चाँद (1) चिडिया (1) चित्र (1) चिमनियों (1) चौराहे (1) छत्तीसगढ़ (1) छाले (1) जंगल (1) जगत (1) जन्मदिन (1) डोली (1) ताऊ शेखावाटी (1) दरबानी (1) दर्द (1) दीपक (1) धरती. (1) नरक चौदस (1) नरेश (1) नागिन (1) निर्माता (1) पतझड़ (1) परदेशी (1) पराकाष्ठा (1) पानी (1) पैगाम (1) प्रणय (1) प्रहरी (1) प्रियतम (1) फाग (1) बटेऊ (1) बाबुल (1) भजन (1) भाषण (1) भूखे (1) भेडिया (1) मन (1) महल (1) महाविनाश (1) माणिक (1) मातृशक्ति (1) माया (1) मीत (1) मुक्तक (1) मृत्यु (1) योगेन्द्र मौदगिल (1) रविकुमार (1) राजस्थानी (1) रातरानी (1) रिंद (1) रोटियां (1) लूट (1) लोकशाही (1) वाणी (1) शहरी (1) शहरीपन (1) शिल्पकार 100 पोस्ट (1) सजना (1) सजनी (1) सज्जनाष्टक (1) सपना (1) सफेदपोश (1) सरगम (1) सागर (1) साजन (1) सावन (1) सोरठा (1) स्वराज करुण (1) स्वाति (1) हरियाली (1) हल (1) हवेली (1) हुक्का (1)
hit counter for blogger
www.hamarivani.com