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गुगल बाबा

इंडी ब्लागर

 

जीवन में सुगंध भर लो-----फ़ूलों से हो लो तुम ।

 इस गीत को मैने लगभग 10 वर्षों पूर्व लिखा था-आज पुन: प्रकाशित कर रहा हूँ, आशा है कि आपको पसंद आएगा।
फूलों से हो लो तुम,जीवन में सुंगध भर लो
महकाओ तन-मन सारा भावों को विमल कर लो
फूलों से हो लो तुम ........................................

वो मालिक सबका हैं ,जिस माली का हैं ये चमन
वो रहता सबमे हैं तुम ,कर लो उसी का मनन
हो जाये सुवासित जीवन ऐसा तो जतन कर लो
फूलों से हो लो तुम.......................................


शुभ कर्मों की पौध लगाओ जीवन के उपवन में
देखो प्रभु को सबमे वो रहता हैं कण-कण में
बन जाओ प्रभु के प्यारे ऐसा तो करम कर लो
फूलों से हो लो तुम......................................


मै कोन?कहाँ से आया ? कर लो इसका चिंतन
जग में रह कर के ,उस दाता से लगा लो लगन
रह कर के कीचड़ में खुद को कमल कर लो
फूलों से हो लो तुम.......................................


वो दाता सबका हैं, दुरजन हो या सूजन
वो पिता सबका हैं, धनवान हो या निरधन
ललित उसमे लगा करके जीवन को सफल कर लो
फूलों से हो लो तुम ........................................


कितना है मुस्किल घरों से निकलना--जन्माष्टमी पर विशेष

युग पुरुष योगेश्वर श्री कृष्ण का आज जन्मदिवस है, इस अवसर पर मन में आया कि कुछ गीत सा रचा जाए। आपके लिए प्रस्तुत है-जन्माष्टमी पर आनंद लें।

पनघट जाऊँ कैसे,छेड़े मोहे कान्हा
पानी नहीं है,जरुरी है लाना
पनघट जाऊँ कैसे,छेड़े मोहे कान्हा

कितना है मुस्किल घरों से निकलना
पानी भरी गगरी को सिर पे रखके चलना
फ़ोड़े न गगरी,बचाना ओ बचाना
पनघट जाऊँ कैसे,छेड़े मोहे कान्हा

गगरी तो फ़ोड़ी,कलाई न छोड़ी
खूब जोर से खैंची और कसके  मरोड़ी
छोड़ो जी कलाई, न सताना ओ सताना
पनघट जाऊँ कैसे,छेड़े मोहे कान्हा

मुंह नहीं खोले,बोले उसके नयना
ऐसी मधुर छवि खोए मन का चैना
कान्हा तू मुरली बजाना ओ बजाना
पनघट जाऊँ कैसे,छेड़े मोहे कान्हा


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दादी-----कहानी -------(ललित शर्मा)

 

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