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आचार्य ललित मुनि,
शनिवार, 9 जनवरी 2010
दो कवितायेँ
(१)
वह
भूख से
मर गया
तलाशी में
उसके थैले से
चावल निकला
(२)
उसने
उड़ने के लिए
जोर लगाया
उड़ ना सका
पंख
गिरवी थे
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न वरात्रों की धुम जोरों पर है। छत्तीसगढ़ मे जसगीत गाने वाली सेवा टोलियां जंवारा स्थल पर जाकर देवी माता की सेवा कर रही हैं , जगह-जगह जंवारा गी...
माँ, पत्नी और बेटी------एक कविता-------->>>>>ललित शर्मा 0:-
पु रुष का जीवन मातृशक्ति के ईर्द-गिर्द ही घुमता है, उसे सबकी सुननी पड़ती है, माँ का हक होता है पुत्र पर तो पत्नी भी उतना ही हक जताती है फ़िर प...
इसे अवश्य पढिए-अच्छे लोग किनारे हो गए!!!
कल रात की बात है, हम कुछ लिख रहे थे तभी चैट पर हमारे बड़े भाई गिरीश पंकज जी का आगमन हुआ और उन्होंने पूछ "फौजी भाई क्या हाल चाल है...
कितना वह मजबूर था--श्रमिक दिवस पर विशेष
आज एक मई श्रमिक दिवस है, श्रम शील हाथों को समर्पित एक पुरानी रचना पेश कर रहा हुँ। आशा है कि आपको पसंद आएगी। दुनिया बनाई देखो उसने कितना ...
मुझे जरुरत है तुम्हारे स्नेह मंत्र से अभिमंत्रित स्वेटर की !!!!!
मै जान जाता था कि अब सर्दी आने वाली है जब देखता था तुम्हारे हाथों में सलाई और ऊन की गेंद दिन भर के घर के काम से अवकाश पाते ही तु...
एक प्रार्थना है !!!!!(ललित शर्मा)
हम मानते हैं कि ईश्वर नाम की कोई अदृश्य शक्ति है जो इस संसार,चराचर जगत को चला रही है नियंत्रित कर रही है. पूरा ब्रह्माण्ड उसी के अधीन है. हम...
उगे बीज को मरते देखा, जैसे कोई गर्भपात हो गया।
एक बीज से आस जगी थी, मृगतृष्णा सी प्यास जगी थी, सारा चौपाल सूना-सूना था, जैसे गांव में आग लगी थी, चारों तरफ़ सन्नाटा-ही स...
प्रिय तेरी याद आई
जब मौसम ने ली अंगड़ाई बदरी ने झड़ी लगाई सूरज ने आँखे चुराई तब,प्रिय तेरी याद आई। जब अपनो ने की बेवफ़ाई पवन ने अगन लगाई घनघोर अमावश छाई...
एक कवि लड़ रहा दो मोर्चों पर-लोकतंत्र शर्मिंदा है!! (गिरीश पंकज)
डी. आई. जी. का डंडा महिला पर चलने से एवं कलेक्टर द्वारा मातहत कर्मचारी को थप्पड़ मारने से एक कवि का मन आहत हुआ और आक्रोश से भर उठा. कलम करने...
रामपुर गांव
नदियों में नाथ शिवनाथ नदी के तीर बसा हुआ सूंदर सा गाँव रामपुर, जहाँ पीपल की छांव, मांझी की नाव, नदी तट पर जलक्रीड़ा करती सोन मछरिया, स...
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