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पनघट मैं जाऊं कैसे?छेड़े मोहे कान्हा !!!!



पनघट मैं जाऊं कैसे, छेड़े मोहे कान्हा 
पानी      नहीं    है,    जरुरी   है   लाना

बहुत   हुआ  मुस्किल, घरों  से  निकलना 
पानी  भरी  गगरी को,सर पे रख के चलना
फोडे  ना   गगरी,   बचाना    ओ    बचाना 

पनघट मैं जाऊं कैसे,छेड़े मोहे कान्हा 
पानी      नहीं    है,    जरुरी    है   लाना

गगरी    तो   फोडी   कलाई   भी  ना  छोड़ी
खूब   जोर  से  खींची  और  कसके  मरोड़ी 
छोडो  जी  कलाई,  यूँ सताना  ना   सताना

पनघट मैं जाऊं कैसे,छेड़े मोहे कान्हा 
पानी      नहीं     है,   जरुरी   है   लाना 

मुंह    नहीं    खोले    बोले    उसके    नयना 
ऐसी   मधुर   छवि  है  खोये  मन का चयना
कान्हा   तू   मुरली    बजाना   ओ   बजाना

पनघट मैं जाऊं कैसे,छेड़े मोहे कान्हा 
पानी      नहीं    है,   जरुरी   है   लाना 


आपका 
शिल्पकार 

फोटो गूगल से साभार




दुनिया है आनी जानी रे बन्दे, दुनिया है आनी जानी




दुनिया  है  आनी  जानी  रे  बन्दे,  दुनिया  है आनी जानी 
बोल  ले  अब  तो  अपने  मुंह से प्यारे प्रभु की मीठी बानी 
दुनिया    है    आनी     जानी , 
दुनिया   है  आनी  जानी,रे बन्दे


सुन्दर  थी वह  गात  भी  गई,  गरजने वाली बात भी गयी
रहता   है  क्यों भुला-भुला,  साँस  गई  और  रात  भी गई
छोड़  दे  अब  तू तीर कमानी,
दुनिया है आनी जानी रे बन्दे 


राजा  गये और  गए भिखारी,मुरख गये और नीति धारी
रहता  है  क्यों  फुला-फुला, नामी  गये  और  गद्दी  धारी 
फिर  भी  तुने  बात  ना मानी
दुनिया है आनी जानी रे बन्दे.


साधू  गये  और महंत भी गए,संत गये और  असंत भी गए
तू माया पींग पर झुला-झुला,ना जाने कितने बसंत भी गये
फिर क्यों करता तू अभिमानी
दुनिया  है  आनी  जानी रे बंदे


कर  ले  अब  कुछ  तो  समाई, छोड़  दे  सारे  दुर्गुण  भाई,
प्यारे  प्रभु में  लगन लगा कर,कर ले कुछ तो नेक कमाई 
संवर   जायेगी  ये जिंदगानी,
दुनिया है आनी जानी रे बन्दे,


आपका 
शिल्पकार


फोटो गूगल से से साभार

सदियों का मर्ज ही मेरे हिस्से आया



                                              
 सदियों    का   मर्ज  ही   मेरे  हिस्से  आया
पत्थरों   का   कर्ज   ही  मेरे  हिस्से  आया


कलियों   को  चुन  लिया  माली ने बाग से
काँटों   का  जिस्म  ही  मेरे  हिस्से   आया


राज  सदियों   से   उनके   लिए   ही    रहा
काम  दरबानी  का  ही  मेरे  हिस्से   आया


कौन सुनता है मेरी रिन्दों  की  महफिल में
फ़कत  खाली  जाम  ही  मेरे  हिस्से  आया


बहुत  किस्से  सुने  थे  इंसाफ   के   तुम्हारे 
फ़कत मौत का पैगाम  ही मेरे हिस्से आया








आपका
शिल्पकार
(फोटो गूगल से साभार) 

 

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