जाग मुसाफिर नाव लगी हैं तुझे जाना हैं उस पार
अरे छोड़ मोह कांकर पाथर का झटपट होले सवार
रे बन्दे जाना भवपार
इस नाव का नहीं किराया,सबका दाता हैं करतार
जाते ही तुझको गले लगाए, वो ऐसा हैं भरतार
रे बन्दे जाना हैं भवपार
जिस पर तुझको बड़ा गरब हैं ,वो नरतन हैं बेकार
जिस दिन छोड़ जाएगा पंछी, वो पड़ा रहेगा बेकार
रे बन्दे जाना हैं भवपार
अब तक बैठा नाव पाथर की, तू डूबन को तैयार
जब प्रियतम की नाव लगी हैं, कयूं डूबे मझधार
रे बन्दे जाना हैं भवपार
आपका
शिल्पकार
(फोटो गूगल से साभार)
जाग मुसाफिर नाव लगी हैं तुझे जाना हैं उस पार
जागरण का यह सन्देश वाह
छायाचित्र बेमिसाल
नवरात्री की शुबकामनाएं
जिस दिन छोड़ जाएगा पंछी, वो पड़ा रहेगा बेकार
बहुत भावः भरा है,ये दुनिया तो आनी है,
behtarin kaaya geet hai
आपका लेखन उंचाईयों को छू रहा है,
शुभ कामनाएं
आपकी यह रचना मुझे बहुत बहुत पसंद आई. बार-बार पढने को मन कर रहा है. शुक्रिया. बहुत खूब! जारी रहें.
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Till 25-09-09 लेखक / लेखिका के रूप में ज्वाइन [उल्टा तीर] - होने वाली एक क्रान्ति!
सुन्दर भाव, आभार.
this is very beautiful song and ii feel so pleasurable to read it. i want to give many wishes to poet to write this meaningful song and make us to read and make our attraction towards poem, songs and much more again well wishes with you always.