शिल्पकार. Blogger द्वारा संचालित.

चेतावनी

इस ब्लॉग के सारे लेखों पर अधिकार सुरक्षित हैं इस ब्लॉग की सामग्री की किसी भी अन्य ब्लॉग, समाचार पत्र, वेबसाईट पर प्रकाशित एवं प्रचारित करते वक्त लेखक का नाम एवं लिंक देना जरुरी हैं.
रफ़्तार
स्वागत है आपका

गुगल बाबा

इंडी ब्लागर

 

मेरे थिरक उठे हैं पांव..............



हरियाली  के चादर ओढे, देखो मेरा  सारा गांव ,
झूमके बरसी बरखा रानी,मेरे थिरक उठे हैं पांव,
मेरे  थिरक  उठे हैं पांव..............................


खेतों में है हल चल रहे, बूढे पीपल पर हरियाली,
अल्हड  बालाओं  ने भी,  डाली पींगे सावन वाली,
गोरैया  के  संग-संग  मै  भी,  अपने  पर फैलाऊ,
मेरे थिरक उठे हैं पांव.................................


छानी  पर  फूलों  की  बेले, बेलों पर  बेले ही बेले,
नवयोवना सरिता पर भी हैं,लहरों के रेले ही रेले,
हमको  है  ये  पार कराती, एक  मांझी  की नाव,
मेरे थिरक उठे हैं पांव..............................


भरे  हैं  सब ताल-तलैया,झूमी है अब धरती मैया,
मेघों ने भी डाला डेरा, छुप गए हैं अब सूरज भैया,
गाय-बैल  सब  घूम-घाम  कर, बैठे   अपनी  ठांव,
मेरे  थिरक  उठे  हैं  पांव................................






आपका
शिल्पकार

( चित्र गूगल से साभार)

रात चाँद की कोशिशें नाकाम हुई

सूना-सूना सा लगता है तेरे बिना 
दिन पहाड़ सा लगता है तेरे बिना
कड़कती है बिजलियाँ बड़ी जोर से
बड़ा  डर  लगता  है मुझे तेरे बिना


रात   काली   भयानक  हो  जाती है
घर-घर  सा  नहीं लगता  तेरे  बिना
बिस्तर पर रेंगती है हजारों चीटियाँ
खा  जाएँगी मुझे लगता है तेरे बिना


मेरा  सूरज  तो  अब  उगता ही नहीं
उजियारा  नही  लगता  है  तेरे बिना
रात  चाँद  की  कोशिशें  नाकाम हुई
अमावश  सा  अंधियार  है  तेरे बिना

आपका 
शिल्पकार

अपना दर्द आंसुओं में निचोती रही कविता

कई  बरसों  से किताबो में सोई रही कविता
अपना दर्द आंसुओं में निचोती  रही कविता
आंसू   लहू  से  कागज  पर  नित  झरते रहे
दर्द  को  दिल  में  ही  संजोती  रही  कविता

 तुम्हारे  आंसू  की  हर  एक  बूंद  सरिता  है
तुम्हारा   कहा   हर   शब्द   मेरी   गीता  है
सोचता   हूँ   तुम्हे  गीतों  में  ढालूँगा  कभी
तुम्हारी  साँस का  हर स्वर मेरी कविता है

सावन का  आज पहला दिन  पहली बरसात हुयी 
तन-भीगा, मन भीगा मेह  वर्षा  की शुरुवात हुयी
फिर  भी  ना  छलका  तुम्हारे   स्नेह   का सागर 
सारी  धरती  भीग गयी यूँ झमाझम बरसात हुयी 


आपका
शिल्पकार

 

लोकप्रिय पोस्ट

पोस्ट गणना

FeedBurner FeedCount

यहाँ भी हैं

ईंडी ब्लागर

लेबल

शिल्पकार (94) कविता (65) ललित शर्मा (56) गीत (8) होली (7) -ललित शर्मा (5) अभनपुर (5) ग़ज़ल (4) माँ (4) रामेश्वर शर्मा (4) गजल (3) गर्भपात (2) जंवारा (2) जसगीत (2) ठाकुर जगमोहन सिंह (2) पवन दीवान (2) मुखौटा (2) विश्वकर्मा (2) सुबह (2) हंसा (2) अपने (1) अभी (1) अम्बर का आशीष (1) अरुण राय (1) आँचल (1) आत्मा (1) इंतजार (1) इतिहास (1) इलाज (1) ओ महाकाल (1) कठपुतली (1) कातिल (1) कार्ड (1) काला (1) किसान (1) कुंडलियाँ (1) कुत्ता (1) कफ़न (1) खुश (1) खून (1) गिरीश पंकज (1) गुलाब (1) चंदा (1) चाँद (1) चिडिया (1) चित्र (1) चिमनियों (1) चौराहे (1) छत्तीसगढ़ (1) छाले (1) जंगल (1) जगत (1) जन्मदिन (1) डोली (1) ताऊ शेखावाटी (1) दरबानी (1) दर्द (1) दीपक (1) धरती. (1) नरक चौदस (1) नरेश (1) नागिन (1) निर्माता (1) पतझड़ (1) परदेशी (1) पराकाष्ठा (1) पानी (1) पैगाम (1) प्रणय (1) प्रहरी (1) प्रियतम (1) फाग (1) बटेऊ (1) बाबुल (1) भजन (1) भाषण (1) भूखे (1) भेडिया (1) मन (1) महल (1) महाविनाश (1) माणिक (1) मातृशक्ति (1) माया (1) मीत (1) मुक्तक (1) मृत्यु (1) योगेन्द्र मौदगिल (1) रविकुमार (1) राजस्थानी (1) रातरानी (1) रिंद (1) रोटियां (1) लूट (1) लोकशाही (1) वाणी (1) शहरी (1) शहरीपन (1) शिल्पकार 100 पोस्ट (1) सजना (1) सजनी (1) सज्जनाष्टक (1) सपना (1) सफेदपोश (1) सरगम (1) सागर (1) साजन (1) सावन (1) सोरठा (1) स्वराज करुण (1) स्वाति (1) हरियाली (1) हल (1) हवेली (1) हुक्का (1)
hit counter for blogger
www.hamarivani.com